पंख शायरी pankh shayari in hindi- दोस्तों जब पंछी रूपी इंसान पंख कटवा लेता है तो वो बिना पंखो के कुछ ऐसा हो जाता है। जिसको कवि ने अपनी कल्पनाओं में शायरी के माध्यम से वनित किया है। कवि के दिल की बाद आपके दिल तक पहुंचेगी। एक पंख में बहुत कम वजन होता है। वही आसमान की शेर करवाता है। बिना पंख जीना कैसा होता है । उस परिंदे से पुछो जो पहले पंखो के शारे आसमान की शेर किया करता है। अब वो आसमान की शेर सिर्फ कल्पनाओं में कर पाता है॥
काट देते हैं पक्षी अपने वो पंख जिस पंख ने उसे उड़ान दी है
और लोग बेघर कर देते है उस मां बाप को जिसने उसे इस जग में स्थान दी है।
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उड़ना तो हम भी खूब चाहते हैं जनाब….
पर जिम्मेदारियां कैची बनकर उम्मीदों के पर काटने पर मजबूर कर देती है
देती है ज़िंदगी हर बार हमे मौका पर ज़िम्मेदारी हर बार टाल देती है॥
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पंख उन्हें मुबारक हो, जिन्हे आसमां तक जाना हो
हमारा मंजिल तो, संघर्ष से भरा है जनाब,
हमे खूद रास्ता बनाना हैं॥

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खुद ही थामे बैठा हूं औजार अपनी बर्बादी का,
काट दू पंख अपने या खिचू ढोर आजादी का॥
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समझ कर कमज़ोर खुद को न काट अपने पंखों को,
मेहनत का रंग एक दिन ज़रूर लाएगा।
रख हौसला कर हिम्मत,
तू भी एक दिन आसमानों में नज़र आएगा।।
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सारे शायरो को दिल से सलाम,
सब अपने दिल का दर्द दबाये बैठें है,
इतनी ही उम्र में बड़े धोखे खाये बैठे है,
आया था उस परिंदे पर सायरी करने,
यहाँ उनसे भी बारे परिंदे अपनी सायरी मे आँसु छुपाये बैठे है॥

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इस नफरती दुनिया ने दिल को, दो टुकड़ों में बांट दिया।
कहीं दूर तलक न उड़ जाऊं, मैंने खुद के परों को काट दिया।।
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पंख लग गए इंसानों को अब हमारी जरूरत कहा आसमानों को
वो जीना चाहते है हमारे बिना ,लेकिन वो मुमकिन नहीं फ़ासलों को॥
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जिनकी जैसी सोच वो वैसी कहानी रखता है,
कोई परिंदों के लिए बंदूक तो कोई पानी रखता है॥

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मुश्कुराना था पर हम मुश्कुराना न सके।
और गीत खुशियो के हम गा न सके।
उड़ कर सफर तय करना था बहुत दूर का।
कुछ मजबूरियाँ थीं साहब, अपने पैरों को हिला न सके।।

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रकीबों की महफिल में आ के बैठा हूँ, अपना ही घर जला के बैठा हूँ।
बेबस हूँ अब मैं उड़ भी नहीं सकता, अपने पंखों पे कैंची चला के बैठा हूँ।।
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पंख काटकर उसने परिंदा छोड़ दिया
जान भी ले ली और जिंदा भी छोड़ दिया ॥
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बो दिन बो नज़ारा भी आएगा ,
समुन्द्र है अगर तो किनारा भी आएगा ।
जिंदगी की परशानियों से हार मत जाना ऐ दोस्त कि.
तुझसे मिलने एक दिन वो सितारा भी आएगा॥

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पंख कटने का किस्सा ना होता
अगर चोच मी कैची का हिस्सा ना होता ॥
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जिम्मेदारीयों ने अपनों से दूर किया
वो खुशी से रह पाये इसलिए हमने खुद को उनसे दूर किया।
कभी उड़ा करते थे हम भी इस उन्मुक्त गगन में,
पर कुछ मजबूरियों नें.. पंख काटने पर मजबूर किया ॥
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इंसान संघर्ष व मेहनत से ज़्यादा दुसरे इंसान को गिराना चाहते है
खुद तो खड़े है मौत की चोटी पर , वो दुशरों को खुश कहाँ से देखने
वो तो अपनों को भी मारना चाहते है॥
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आसमान की चाहत थी, लेकिन जमीन पर ही रह गए,
कैंची ने काटा पंख हमारा, और उड़ने के सपने अधूरे ही रह गए।।

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ऊंचाइयों को छूना आदत थी मेरी पर ।
मेरे अपनों को मेरा उड़ना रास ना आया ।
दुश्मनों को झुकना सीख लिया था मैने ।
पर जिनको अपना माना उन से ना लड़ पाया ।।
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मंजिल उन्हीं को मिलती है,
जिनके सपनों में जान होती है,
पंख से कुछ नहीं होता,
हौसलों से ही उड़ान होती है॥
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मेरी उड़ान तुझसे थी।
तेरे बिना उड़ के क्या करूंगा।।
जीना था तेरे साथ ज़िंदगी भर
तेरे बिना जीकर भी क्या करूंगा॥

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अब तू ही न रही मेरी जिंदगी में।
तो इन पंखों का क्या करूंगा।
अब मैं मौत को गले लगा रहा हूँ
अब तेरे बिना जीकर क्या करूंगा॥
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लोगों ने पंख भी काट दिया और आजाद भी कर दिया,
जीने की झूठी उम्मीद देकर मुझे बर्बाद कर दिया ॥
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सोचा ना था की हम खास से आम हो जायेंगे……
हमारे उडने वाले पंख भी किसी कैंची के गुलाम हो जायेंगे॥

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देख कर बड़ा दुःख होता हैं आँखें नम और दिल रोता है
पढ़े लिखे समाज में महिलाओं का यही हाल होता हैं
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दो कदम साथ सभी निभाते है जिंदगी भर साथ कोई नहीं निभाता
रो कर भुलाई जाते यादें ,तो हस कर गुम छुपाते हो ॥
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मगर वक्त हर ज़ख्म को भर देता है,
जो टूटता है, वही फिर से संवर देता है।।
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एक दिन यही परिंदा फिर से पंख फैलाएगा,
अपने हौसले से आसमान तक जाएगा।।

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सबकी अपनी अपनी कहानी होती हैं।
वो ऐसा है, वो वैसा हैं,कौन जाने कौन कैसा है।
इतना ना किसी की जिंदगी में झांका करो।
दूसरों पर उंगली उठाने से पहले खुद को उस जगह पर रख कर आका करो।
सबकी अपनी अपनी जिंदगी और अपनी अपनी कहानी है।
किसी के होठों पर मुस्कान तो किसी की आंखों में पानी हैं॥
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दिल पे क्या गुजरी ये अनजान क्या जाने दर्द किसे कहते है
ये बेजान क्या जाने, हवा में तबाह हो गया घर जिस
परिंदे का दर्द उस परिंदे का ये तूफान क्या जाने॥
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पंखों को काट कर भी उड़ने का ख्वाब रखते हैं,
हम अपने दर्द का खुद ही जवाब रखते हैं।।
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आज़ादी से डरते हैं या बंधन से प्यार है,
इस सवाल में ही हमारा पूरा संसार है।।

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इस तसवीर ने क्या अजब चीज दिखाई हैं
अपने माब ही सच है और इसके अलावा चारों तरफ बेवफ़ाई है॥
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मेरी भी थी चाहत उड़ान भरने की ,
कुछ पाने कुछ बड़ा करने की।
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जनाब हम बेटियाँ हैं हमे पंख फैलाने की इजाजत नहीं
कुछ करना चाहती है समाज में पर आगे बढ्ने की इजाजत नहीं
हमे बना दिया घर की इज्जत इज्जत दांव पर लगाने की इजाजत नहीं
हम घुट घुटकर मरते है , हमे खुले में जीने की इजाजत नहीं ॥
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कुछ मौन तस्वीरें सब कुछ बया कर जाती है
दिखती है मासूम फिर भी सब कुछ बता जाती है,
हम सब कुछ देखकर भी मौत है
हम सोचते है हमे क्या पता वो कौन है॥

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आसमा और जमी को कुछ यूँ बाट दिए गए
कहाँ से देखूँ परिंदे आसमा मे कुछ पिंजरों में ,
तो कुछ के पंख काट दिए गए ॥
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घर की कुछ जिम्मेदारियां उठाएं बैठे है
जी चाहता है सब कुछ आज ही छोड़ दूँ
पर घर वाले मुझसे आस लगाएँ बैठे है॥
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लड़कियां समाज की तानों के डर से अपने पंख तोड़ देती हैं ।
लगा ना दे दाग हमारे दामन पर ये समाज,
इसलिए हम लडकीय मुस्कुराना छोड़ देती हैं ।।
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हमारे हौसले बड़े हैं मुर्शद,
हम सब कुछ कर दिखाएंगे।
अपने पंख कटेंगे नहीं समाज के डर से ,
इन्हीं के सहारे आसमान के पार जाएंगे
मेरे दोस्तों यह मेरी एक छोटी सी कोशिश थी
अगर आपको पसन्द आए तो जरूर बताइएगा ॥

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जिन्दगी में मेरे जैसे ,अनसुलझे बहुत है
जो लालच में अपने सपनो के पंख को ही काट लेते है”
जब हो जाती है जिंदगी बरदास्त से बाहर तो
लोग फंदे को झूल जाते है॥

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पंखो को काटकर पिंजरे मे जा बैठा हू
घूमता फिरता हू फिर भी जिन्दा लाश बन बैठा हू ॥
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अपने ही पंखों को काटता पंछी, आसमान का सपना त्यागता पंछी।
मजबूरियों के बंधन में जो जकड़ा, अपनी ही उड़ान को भाग्य मानता पंछी।।
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बचपन में खूब देखी थी पक्षियों की उड़ान
चिड़ियों की चेह चेह कोयल की गाण अब कैसे कहदे कि इंसान महान ॥
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दुसरो के दर्द को मरहम लगाए बैठे हैं
जब हम पर दर्द आया तों अपनें ही मुंह बनाएं बेठें है॥

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दर्द उनको मिलता हैं जो दिल से रिश्ता निभाते है ,
वरना आज़ाद पक्षी तो आसमान में नज़र आते है ॥
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पंख लग गए है इंसानों के अब जरूरत नहीं आसमानों की
रिश्तेदार कैंची लेके बैठे है उड़ने नहीं देते है आसमानों में ॥
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इन परिंदों की पंख ना काटो साहब ये तो उड़ने का जज्बा रखते है,
उड़ते भी वही है जो गिर के उठने का जज्बा रखते है।।
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भरोसे का कत्ले आम है जिस पर आँख बंद कर किया
भरोसा, उसी ने किया मेरा जीवन हराम है ॥

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मंजिल उन्हीं को मिलती हैं जिनके सपनों में जान होती हैं
पंख से कुछ नही होता होसलो से ही उड़ान होती हैं,
तू आगे बढ़ता चला जा मत सोच दुनिया की
दुनिया तेरे लिए कुछ नहीं करेगी
ये आपकी सफलता देखकर यूं ही परेशान होती है॥
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चीर दिय जमाने ने पंख अपनी जरूरतों के हिसाब से।
देखो केंची भी रंग गई लहू के रिसाव से॥
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तेरी यादों में हम हर पल रोया करते है
सहन नही होती हमसे ये जुदाई तेरी
इस लिए हम अपने ही हाथो अपने पंख मरोड़ा करते है॥

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उड़ने की तो सभी को तमन्ना होती है
लेकिन मजबूरियां बांधे रखती है ॥
उम्मेद का चिराग ऐसा होता है
की टूटे हुए दिल को मजबूरी से सांधे करती है॥
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उड़ने का हक हमे भी था, मगर हम पंख ही गंवाए बैठे हैं,
कोमल मुहब्त कर बैठे तीखे ओजारो से ,अब पंख कटवाए बैठे हैं ॥
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कहने को तो बहुत कुछ कहती मगर
है मां मोहब्बत सच्ची है बाकी तो सब झूठ है ॥

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कैंची के निशान से, उड़ान का ख्वाब टूटा, फिर भी आशा की किरण, मन में जलती रही
तू मुझसे दूर हो गई पर तुझसे मिलनी की तमना मन में चलती रही॥
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जिंदगी भी इस पंछी की तरह है….
जो जिने की वजह होती है।
देती कुछ नहीं है लेकिन
छीन सब कुछ लेती है॥

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अपने हाथों में ही होती है
बिना निशा कहलोगे तो मिलेगी बंदगी॥
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हां बिखर जाता हूं कई बार खुद को बनाने में.
जी रूठ गए थे जमाने की बातें सुनकर लगा हूं उनको मनाने में ।।
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खुले गंगन (लक्ष्य) के परिंदे किसी के मोहताज नहीं होते।
वो नये पंख (रास्ते) के खातिर पुराने पंख को काट देने कि हिम्मत रखते हैं।।

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ग़ालिब मुसिबत के डर से ध्यान हटा कर तो देखो ।
मुसिबत का रास्ता भी निकल आएगा और मजा भी आएगा ॥
एक बार नजर घुमाके तो देखो॥
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काटा है पंख मैंने खुद के हाथों से कि मंजर था
आज़ादी का और अपने मायूश थे मेरे उड़ान से…
किस कदर झूम उठी हूं
मै ये सोच कर कि हौसलो का परिंदा हूँ,
उड़ रहा भी हौसले पर ,और हौसले के पंखों पर ही जिंदा हूँ ॥
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फंस चुके हैं हम अपने ही बुने जाल में,
अब उड़ भी नहीं पाएंगे आने वाले नए साल में ॥

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कट गए पैर हमारे तो क्या हुआ-
फिर भी अपने लक्ष्य के प्रति हौसला बनाए रखना है,
सफलता की सीढ़ी चढ़कर नाक बचाए रखना है।।
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चिड़िया हूँ, पंख तो फैलाऊँगी।
न बांध कर रख सकोगे मुझे,
पंखों को फड़ फड़ाऊँगी।।
एक न एक दिन,
उड़ान तो मैं भर जाऊँगी।
एक ऊँचाई तक,
अपनी पहचान बनाऊँगी।
डाल पैर बैठी हूँ तेरी,
अपना घोंसला यही बनाऊँगी।
रख हौसला मुझ पर,
लौट कर वापस यही आऊँगी।
अपने साथ साथ,
नाम तेरा भी मैं कर जाऊँगी।
चिड़िया हूँ,
पंख तो फैलाऊँगी ॥

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इस जगत का यही नियम हे जो भी चीज चाहिए
उसके लिये कूच खोना पड़ता हैं।
ज़िंदगी में जो ना भी हो वही होना पड़ता है ॥
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पढ़ाई के लिए बचपन अच्छे जीवन के जवानी
हमारी ले जा रवानी हमे दे जा कुछ निशानी॥
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आसमा और जमी को ऐसे ही नहीं बांट दिए
कहाँ से दिखेंगे जबाज परिंदे आसमा मे
जब कुछ करने से पहले ही अपने पंख काट दिए॥
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मेरे हौसलों में उड़ान तो बहुत ऊंची थी ,
मगर कड़वी जुबां ने पंख कटवा दिए थे ॥

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मंजिल उन्ही को मिलती है जिनके सपनों में जान होती है ,
पंखों से कुछ नहीं होता , होता है जब हमारी ऊंची शान होती है।।
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ले हौसलों के पंख चल उड़ने की तैयारी करते हैं ,
जुड़े रहे जमीन से आसमां की हिस्सेदारी करते हैं॥
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हम खोफ में थे
जब उन्हे जंगल में उड़ते देखा ।
हम अपने ही पंख काट लिये
. जब उन्हें दूसरे के साथ उड़ते देखा ॥
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रास्ते बनाने पड़ते हैं मंज़िल से जुड़ने के लिए
और सिर्फ छलांग ही नही पंख फैलाने के लिए ॥
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क्या सितम है जमाने का,,
प्यार करना गुनाह हो गया है,
और नफरत आसान…
कैसे करूं बिना पंख पूरी,,
अपने सपनों की उड़ान…॥
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अपने अस्तित्व से वाकिफ तू क्यूं अंजान बनता है,
जिस साथी को सीने से लगाए है वही तेरे पंखों का कत्लेआम करता है ॥
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खुद ही काटे हैं पर अपने,
कोई और कसूरवार कहां था,
खुद ही भुगत रहे हैं अपने कर्मों की सज़ा,
कोई और गुनहगार कहां था।।
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बहुत खुश था आजादी के पखं पाकर सोचा था
कि नये जमाने देखुगा
इस जमाने ने ऐसे रंग दिखाए
कि पंख भी बोल उठे मेरा कतल कर दो
अब तो अच्छे दिनों से डर लगता है ,
मुझे मेरे पुराने दिन वापिस कर दो॥

हम नींद में नई खुली अखोन से सपना बुनते है
जीतना फितरत है हमारी, हार से हम नहीं डरते ,
लेकिन जब बात हो आफ्नो की तो , हम लड़के खुशियो को नहीं
बलकी आसुओं को चुनते है ॥
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बुराई दुनिया कि सुनी थीं, कसूरवार सारा संसार था
में जिसे अपना समझ बैठा वो गद्दार मेरा यार था।
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हम पक्षियों को भी कैची चलाना आने लगा
दरिंदों के बीच जीना आने लगा
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ऊंची उड़ान ने सारे रिश्तों को बांट दिए,
सबकी खुशी के लिए पर खुद ही काट लिए।।

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मेरे उड़ने से वो दुखी है तो मैं खुशियां बांट देता हु
उनकी खुशी के खातिर मैं अपने पंख काट देता हु ॥
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खुद ही थाम बैठा हु औजार अपनी बर्बादी का ।
काट दूं पंख अपने या खींचूं डोर आजादी का।।
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ज़िंदगी है लेकिन वक्त कम जिंदगी है लेकिन वक्त कम पहले मां बाप से प्यार होता था अब अपनी जिंदगी में फोन से
उड़ने की चाह तो हमे भी है मां बाप की जिमेदारी सिर पर रखा है
सब कहते तुम कितने अच्छे हो अच्छे कियू ना हो खुद ही अपने पंख काट रखा है॥
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हम भी आसमान मे उड़ने का हौसला रखते थे जनाब ,
लेकिन घर की हलात देख कर खुद की पंख काटनी पड़ी
हमारे दामन में थी हजारों खुशिया
पर लोगो लोगों के लिए हमे अपनी खुशियाँ बांटनी पड़ी॥

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अगर कोई आगे बढ़ना चाहता है तो उसे रोक दिया जाता है ।
जरूरत से ज्यड़ा सफल होता दिखे तो थोक दिया जाता है॥
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जब भी तुम्हारा हौसला,आसमान तक जायेगा
याद रखना कोई न कोई पंख काटने जरूर आएगा ॥
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अपनी चोंच में अपनी मौत की डोर….
और हाथो में अपनी बर्बादी का खंजर ले के बैठा हूँ…
चलाऊ जो हाथ या पैर….. अपनी नाकामी का मंजर ले के बैठा हूँ।।
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छोटी सी जिंदगी है मौज लिया करों
दिल में जो भी है दबकर मत रखना
जो भी कुछ दिल में है बोल दिया करो ॥
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बर्बादियों का सोग मनाना फिजूल था,
बर्बादियों का जसन मनाते चला गया,
खुशी और गम में फर्क महसूस ना हो
, दिल को उस मुकाम पर लाता चला गया ।।
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आजादी का जश्न मनाऊ तो मनाऊं मैं कैसे
कुर्बानियां बहुत सी देनी पड़ेगी जीने के लिए॥

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हम तो वो पन्छी है जनाब जिनके हौसले बुलंद् है
हम आसमान को नाप लेते है एक नजर में चाहे हम पिंजरे में बंद है ।।
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चाँद से रोशनी ज्यादा और सितारों से कम निकले,
जब भी मैं तुझे देखूं मेरा हँस हँस के दम निकले।।
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मेरे पंख काटने का मौका भी मुझे ही दिया
जिनसे मैंने दुनिया देखी मैंने उन्हें ही खो दिया
अब तो खुश होगे ये देखकर जिनसे मैंने उड़ान भरी
आज मैंने उन्हें ही खो दिया ॥
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कभी-कभी दूसरों की उड़ान के लिए कैची मारनी पड़ती है अपने पंखों में ,
बहुत दुख होता है जब दूसरा कामयाब ना हो आंसू आ जाते हैं अपनी आंखों में।।
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ये पंख है आजादी से उड़ान के लिए इसे ना काटो
हम इंसान है मामूली से इसे धर्म जात में ना बांटो॥
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जिसकी जैसी सोच वैसी कहानी रखता है
कोई परिंदों के लिए बंदूक तो कोई परिंदों के लिए पानी रखता है ॥
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करता वही फैसला सबका एक आसन पर डट के
उसकी दिखाई रह पर सब चले कोइ न रास्ता भटके॥

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ये मेरा सुन्दर पंख बस देखने में दूसरे के किसी काम का नही।
जो पंख दुसरे का उड़ने का सहारा ना बन पाए वो मेरे काम का नहीं ॥
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कंबखत ऐसा ही हुं मैं,सबको अपना ही समझता था,
में जिसे प्यार करता था
वही वख्स मेरे यार के सिने में बस्ता था
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कदमों को थाम पंखों को सिल लिया मैने
मैं औरत हूं साहब सब रिश्तों को ख़ुद में समा लिया मैन॥
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जिंदगी कुछ इस तरह उलझी है,
जनाब प्यार को पकड़ा तो नौकरी गई ,
नौकरी को पकड़ा तो परिवार गया
ईसी चकार में ज़िंदगी भर चलता रहा॥
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सोचा था वहा जाकर फटक से आता हू
कीसी का अपना बनाना यही मेरी खता है
मेरे ही अपने मेरे ही कर्म मै ही जिम्मेदार हू
देख लेना मोह, माया मे भुल बैठा खुद के घर मै का पत्ता हू ॥

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सच क्या जानें हम परिंदे,,
यही तो जीवन का इम्तेहान है,
चाहे बांध लो जितने डोर या जकड़ दो बेड़ियों से
हम तो कटे पंख से भी उड़ेंगे,क्योंकि हमारा घर ही आसमान है ॥
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क्या गैरों ने अपना कुछ बिगाड़ा है और बिगाड़ेगा ये तो दूर की बात है,
हमने तो अपने ही आसियाने उजाड़े है ,जनाब ये तो एक मगरूर की बात है।।
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बेजुबान उड़ कर आसमान में भी इंसान के मोह में कैद है
देख रहा है अपने पंख काट कर क्या वो भी चालबाज इंसान की तरह तेज है ॥
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मत काट खुद अपने पर पंछी….
मत काट खुद अपने पर पंछी….
उडान तेरी हौसलो से भी बुलंद है….
तू बस अपने दिल की सूनले….
तुझे रोकने की किसिकी क्या ही मजाल हैं॥
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लाख कमियां गिना कर मुझ में,
मेरे पंख काटने को वो बैठे हैं तैयार।
खुद के अस्तित्व को बचाने की उम्मीद में डोर दबाए बैठा हूं मैं
खुदा तेरे दरबार।।

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तुमने खेत खलियान सब अपने हिसाब से बांट लिए
हरा,भगवा,हिंदू, मुस्लिम, गाय सूअर अपने -2 छांट लिए अब उड कर देखना क्या इस जहान में –
ये सोच सोच कर इक परिंदे ने अपने पर काट लिए॥
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में शायर तो नहीं पर बनने की सोच रहा हूँ ,
समाज के डर से अपने ही पंख नोच रहा हूँ॥
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कट जाते हैं वो पंख जब अपने ही मार देते हैं डंक
जब विसवास करूँ अपनो पर तो बज जाता है संख ॥
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कि जिंदगी में दुःख तो बहुत है लगता है काट लूँ
सभी हंसी उड़ायेंगे मेरी , किसके साथ दुख बाँट लूँ॥
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खुद के जीवन पे औजार चला रहा हूं,दूसरे से प्यार करके खुद के किस्मत को बर्बाद करा रहा हूं ,
चाहत मेरी थी आश्मणो में उड़ने की , इन लोगों की नीयत देख खुद के पंख काट रहा हूं।।
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जिसको संभालकर रखा था सीने में
उसी का हाथ है दुख भरे जीने में॥
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काट कर पंख परिंदा छोड़ दिया
जान भी ले ली ओर जिंदा ही छोड़ दिया ॥
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दिल करता है ऊंचे आसमान में कहीं खो जाऊं। तू तो नहीं मिला के सुकून मिलता मेरे ग़मेदिल को।।
टूटे दिल से आवाज लगाता हूँ , छुपकर आन्शू , खुश करता उन महफिल को ॥
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बहुत थक गया हूं तेरे लिए दौड़कर
मेंने तेरे लिए सब कुछ किया लाखो का दिल तोड़कर ।।

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दिल करता है अब तो एक गहरी नींद में सो जाऊं
जलाकर तेरे दिल में प्यार का दीपक
खुद कहीं अंधेरे में खो जाऊ॥
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देखते देखते देखने लायक हो गये
सुनते सुनते बोलने लायक हो गये
बोलते बोलते शायरी नालायक हो गये॥
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इन्सानो के जुलुम इतने बढणे लगे,
कि हमसे ही हमारे पंख कटवा दिये,
ढोते ढोते प्यार का भोझा , हमें अपने घर बिकवा दिये ॥
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लोग काटकर पंख परिंदो के, जोर अपना दिखाते हैं।
पर होता है हौंसला जिनका बुलंद, वो उड़ना ना सही पर दौड़ लगाते हैं।।

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हाथ में रस्सी को लेकर में अपनो को भूल गया
बना के फंदा फासी का में हस्ते हस्ते झूल गया ॥
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हवाओं से कहो कि खुद को
आजमा के दिखाए
बहुत चराग बुझाती है
इक जला के दिखाए ॥
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हालातों ने कतर डाले पर हमारे वरना हम भी आसमान में उड़ा करते थे
तुझे पाने के लिए छत पर सोते थे और रात भर सिसकीया भरा करते थे ॥
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मैने अपने हाथों से अपना घर जलाया है
जब से अपनो से धोखा खाया है ॥
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” टूटे हैं पंख मगर एक उड़ान बाकी है
ख़त्म हुआ हूं नहीं कि अभी जान बाकी है
अग्निपरीक्षाओं से सत्य रोज़ गुज़रेगा जब तलक सफेद झूठ का जहान बाकी है
किसपे विश्वास करें और किससे मशविरा कैसे करें पता कि ईमान कहां बाकी है
लिस्ट में एहसानों की कई नाम कट गए बाकी
हैं कई जिनके नाम वहां बाकी है
कभी-कभी लगता है बदलेगा कुछ नहीं जब तलक कि नफ़रत की वो दुकान बाकी है
गिर गई हैं दीवारें खंभे बने खंडहर पगला सोचता है कि अब भी मकान बाकी है

ख़त्म हुआ हूं नहीं कि अभी जान बाकी है
टूटे हैं पंख मगर एक उड़ान बाकी है॥
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चलो हम अपने प्यार को एक पंछी बना लें
जिसके हम दो पर हो जाएंगे
अगर कट जाए एक भी पर तो हम उड़ नहीं पाएंगे।।
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मै शायर नही हूं लेकिन दिल की बात लिखूंगा इंसान से बड़के ए परिंदा होते जो मजबूरी में पंख काट के भी जिंदा होते है
जी लेते है अच्छे से भर लेते है उड़ान ए किसी से नहीं डरते नहीं सरमिंदा होते ॥
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पंख काट रहा हूँ अपने कोई इतनी भी बड़ी बात नही
मेरे न होने से अगर तू खुश है तो पागल मेरा मरना भी इतनी भी बड़ी बात नहीं ॥
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कैसे कहूं कि मुझे गिराने में लोगों का हाथ है,
मैंने तो अपनी जिंदगी खुद ही बर्बाद की है।।
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कुछ इस कदर गुलाम हुए पिंजरे के कैद का,
जब लोगों ने आजाद किया तो हम उड़ना ही भूल गए
जब नाम लिया आपने आशिक का तो हम अपना नाम भूल गए ॥

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यहाँ तो हर कोई शायर हे। यहाँ तो हर कोई शायर हे.
लिखना कुछ आता नहीं दिल से अमीर जिगर से कायर है ॥
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झंझावतो में फंस गया इस कदर…
पंख होते हुए भी उड़ नहीं सकता
मेरे चरों तरफ हजारो लोग है प्यार करने वाले
पर मेरा दिल तेर बन रह नहीं पाता ॥
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हम थे बावले दिल किसी बेवफा से लगा बैठे
छोड़ हमें वो चले गए जहां से रो भी ना सके दर्द किसी घायल पंछी की तर
ह आंखों में रख मौत की तलाश में ना जाने कहा जा बैठे ॥
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मंज़िल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है।
कौन लुटा हुआ दिल सुनसान होता है ,
खोद के देखों उनकी पुरानी यादो को उनकी हर याद में समसान होता है ..
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के वक़्त बुरा है बुरा तू नहीं रख हौसला यू बर्बाद ना कर खुदको
एक दिन वो भी रोयेंगे जिसने मजबूर किया तुझे अपने पंख काटने के लिए तुझको॥
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आजाद हूं गगन में फिर भी मैं फंस गया हूं….
किसी और को बचाने में.. खुद से ही कट गया हूं…
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एक और पर काट ली हमने दुनिया देखकर..
जब अपने ही चले गए मुझे बर्बादी में फेंककर ॥
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खुद गुनाह करने वाला गुन्हेगार होता है
और गुनाह सहने वाला भी गुन्हेगार होता ..

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की काट देते हैं पंछी अपने पंख जिस पंछी को उड़ान दी
भूल जाते है लोग उन्हें जिनके लिए माँ बाप ने अपनी जान दी..
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घायल तो यहां हर एक परिंदा है ।
पर जो फिर से उठ कर उड़ा सिर्फ वही जिंदा है ।।
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मेरे उड़ने से वो दुःखी है तो , उन्हें खुशियां बांट देता हु ।
उनकी खुशी के खातिर मैं अपने पंख काट लेता हु ॥
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इक डोर आरज़ूओं से बंधी है, कहीं कोई गलती न हो जाए,
अपने ही हाथों, कहीं ज़िन्दगी तबाह ना हो जाए।।
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मेरे मालिक ने मेरी नई जिंदगी का इस कदर आगाज कर दिया,
पंखों को बांध कर निकाला पिंजरे से और बोला जाओ तुम्हे आजाद कर दिया।।
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