moral stories in hindi

Moral Stories in Hindi | सच्चा राष्ट्र धर्म या राष्ट्र प्रेम

Moral Story in Hindi

इस post में हम आपको Moral stories in Hindi के बारे में बताने वाले है। इन stories को आपने बचपन में अपने दादा दादी से सुना होगा। ये कहानियाँ बहुत ही ज्ञानवर्धक और शिक्षावर्धक है। इन नैतिक कहानियों से आप बहुत सारी अच्छी बात सीखेंगे। जिनको आप अपनी life में प्रयोग करके सफलता पा सकते है। ये कहानियाँ बहुत ही रोचक है। जिनको पढ़कर आपको बहुत आनंद आएगा। इनमे कुछ latest moral short stories in Hindi 2021 दी गयी है। यदि आप old stories पढ़ कर बोर हो गए है तो यहाँ पर हम आपको सबसे अच्छी latest 100 Moral stories in Hindi for kids दे रहे है।

Moral stories in Hindi – sachcha raashtr dharm ya raashtr prem

हम सभी वास्तव में एक सामाजिक प्राणी मात्र ही हैं । हमारे व्यवहार तथा पशुओं के कुछ मुख्य मुख्य व्यवहारों में समानता भी है , लेकिन कुछ भिन्नताए भी हैं ।
उदाहरण के लिए कहा भी जा सकता है व माना भी जाता है ।
देखो यहांँ एक श्लोक के माध्यम से यही बताया है कि —
आहार निद्रा भय मैथुनंच ,
एते व्यवहारे नरपशुश्चमाना।।

moral stories in hindi

यहांँ पर समझा गया है कि आहार (खाना -पीना ) , निद्रा ( सोना -जागना ) भय (डरना -डराना ) मैथुनं (मैथुन करना यानि संतान पैदा करना ) ये चारों कार्य करने में हम मनुष्य तथा पशु एक जैसे हैं । लेकिन इन सभी कार्यो के तौर तरीकों , हमें एक दूसरे भिन्न भी हैं यानि श्रेष्ठ
दिखाई देते हैं । इसी प्रकार यदि हममें कुछ सीखने की प्रवृति हो तो कुछ ज्ञान यानि सीखना चाहें तो हमें पशु , पक्षी भी सीखा देते हैं । जेसै स्वामी भक्ति का भाव (मालिक या रक्षक के लिए सेवा भाव )या अपनापन कुत्ते से सीखना चाहिए , संतान के प्रति ममता या वातस्ल्य का भाव गौ माता (गाय ) से , इसी प्रकार स्वदेश यानि अपने देश , और राष्ट्र ,समाज , परिवार , जाति के प्रति प्रेम भाव आदि तो हमें पक्षियों से भी सीखा जा सकता है या सीखना चाहिए ।

Latest Moral Stories In Hindi 2021

एक बार कोई एक शिकारी जो रोजाना जंगल में जाकर पक्षियों को पकडकर लाता था तथा फिर उनको बेचकर जो भी पैसा मिलता , उसी से अपनी व अपने परिवार का भरण पोषण करता तथा प्रसन्नचित रहता था यही उसकी दिनचर्या थी । हां कभी उसे एक पक्षी मिल जाता तो कभी उसे एक से ज्यादा पशु पक्षी भी मिल जाते थे । लेकिन यह काम करते हुए भी उसमें संतोष की भावना बहुत थी । इमानदारी से उसे जो भी एक या दो पशु या पक्षी मिल जाते थे , तो उन्हीं को लेकर वह शिकारी खुशी के साथ अपने घर वापस आ जाता था । हां कभी कभी उसे पूरा दिन कोई भी पशु – पक्षी यानि शिकार भी नहीँ मिलता था , यानि उसको खाली हाथ भी घर वापस आना पडता था ।

परन्तु इसे वह ईश्वर की जैसी मर्जी मानकर बिना किसी दुख की अनुभूति किए अपने घर वापस आ जाता , जो भी घर में होता उससे ही काम चला लेता था ।यही काम करते करते उसका पूरा जीवन बीत गया, यानि वह शिकारी बृद्धावस्था के समीप था । उसकी आयु लगभग 60-वर्ष के पार हो चुकी थी । उसके शरीर में चुस्ती फुर्ती भी अब ज्यादा नहीं थी । वह शिकारी अब पेडों चढकर पक्षियों को पकडना नहीं चाहता था । उसके जाल में जो भी पशु– पक्षी आ जाते या फंस जाते थे । उन्हीं को लेकर वापस घर आ जाता था ।

Dadi Maa Ki Manohar Kahaniya – ShayariOnline.in

एक दिन उसके साथ एक विशेष घटना घटी , लेकिन उस घटना ने उस शिकारी का सारा जीवन बदल दिया । एक दिन जब वह शिकारी घर से शिकार के लिए गया तो उसने देखा कि एक बहुत बडे पेड में आग लगी थी , उस पेड की सभी डालियां धू -धू करके जल रहे थे । उस पेड पर रहने वाले बहुत सारे पक्षी आस पास के उन दूसरे पेडों पर जा बैठे , तथा साथ में (जोर जोर से बोलकर अपना शायद आदि बता रहे थे ।) जो उस आग जल रहे पेड के प्रभाव क्षेत्र से कुछ दूर स्थित थे ।

लेकिन शिकारी ने ध्यान से देखा कि कोई एक कबूतर – कबूतरी (नर- मादा) का जोडा पेड पर ही बैठा है । शिकारी ने उसको वहां से उडकर यानि उस जलते हुए पेड को छोडकर जाने के लिए इस प्रकार समझाने के भाव से यही कहा कि————–
आग लगी है इस वृक्ष में ,
क्यों जलो द्रुम के साथ ।।
उड चलो अब यहांँ से ,
जब पंख तुम्हारे पास ।।

Best Top 100 Motivational Stories

लेकिन उस पेड पर रहने वाले उस पक्षीद्वय ने पेड पर बैठे बैठे ही अपनी भाषा में शिकारी को उस पेड के प्रति अपना कर्तव्य व धर्म की भावना समझाने के लिए कहा था कि ——————
फल खाए इसी वृक्ष के ,
गंदे कीन्हे पात ।
अब धर्म हमार यही है ,
हम जले इसी के साथ।।
अर्थात उन दोनों पक्षियों ने देखते देखते स्वयं को भी उस जलते हुए पेड के साथ अपना भी बलिदान कर दिया था ।

इस प्रकार अपनी इन पंक्तियों के माध्यम से उस शिकारी को भी सच्चा राष्ट्र धर्म व अपनी मातृभूमि या जन्मभूमि तथा अपने परिवार व समाज आदि के लिए एक नया व अनोखा और महत्वपूर्ण , मान सम्मान को बढा देने वाला दायित्व बोध का पाठ समझा दिया । शिकारी भी उनकी इस भावना को सुनकर या समझकर गदगद हो गया तथा उसने भी अनुभव किया कि देखो इन पशुओं – पक्षियों में भी तो अपने जन्म स्थान , घर- परिवार व बच्चों तथा समाज के लिए कितना अटूट निष्ठा भाव होता है ।

True national religion or national love – Moral Story In Hindi

यहांँ हम सभी के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हम पढे -लिखे शिक्षित होने के बाद भी अपनी कुछ बुराइयों को बार बार समझाए जाने पर भी नहीं छोड पाते यानि अपने बुरे या अति बुरे व्यवहार में भी परिवर्तन नहीँ कर पाते । क्योंकि हम सभी में दूसरों से सीखने की इच्छा व अपने गलत व्यवहार में बदलाव बदलाव करने के लिए मन में दृढ- संकल्प की भावना नहीँ होती । तथा हममें कुछ लोग यानि नागरिक ऐसे भी होते हैं कि अपने व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए , और अपने व्यक्तिगत मान सम्मान के लिए , देश पर आने वाले संकट को देखकर या ज्यादा पैसा या अच्छी नौकरी पाने की लालसा से ही अपनी मातृभूमि , देश छोडकर दूसरे देशों में जाकर रहने लगते हैं ।

या हम यह भी कह सकते है कि उनके लिए देश प्रेम व राष्ट्र प्रेम कोई महत्व नहीं रखता इसीलिए वे अपने स्वार्थ के लिए विदेशों के निष्ठा रखने वाले शत्रुपक्षके साथ मिलकर अपने देश व राष्ट्र को पराधीन या गुलाम बनवाने में भी पीछे नहीं रहते ।

Author: Shayari_Love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *