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Moral Stories In Hindi | पुत्र की पहचान व परीक्षा 

पुत्र की पहचान व परीक्षा

इस post में हम आपको Moral stories in Hindi के बारे में बताने वाले है। इन stories को आपने बचपन में अपने दादा दादी से सुना होगा। ये कहानियाँ बहुत ही ज्ञानवर्धक और शिक्षावर्धक है। इन नैतिक कहानियों से आप बहुत सारी अच्छी बात सीखेंगे। जिनको आप अपनी life में प्रयोग करके सफलता पा सकते है। ये कहानियाँ बहुत ही रोचक है। जिनको पढ़कर आपको बहुत आनंद आएगा। इनमे कुछ latest moral short stories in Hindi 2021 दी गयी है। यदि आप old stories पढ़ कर बोर हो गए है तो यहाँ पर हम आपको सबसे अच्छी latest 100 Moral stories in Hindi for kids दे रहे है।

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latest 100 Moral stories in Hindi for kids

यह कथा लेख संस्कृत भाषा साहित्य के महाकवि कालिदास जी द्वारा रचित विक्रमोर्वशीयम् से सबंधित है । जो एक ऐतिहासिक व सत्य कथा पर आधारित है ।
एक दिन एक तपस्वनी स्त्री अपने एक युवावस्था की आयु वाले पुत्र को लेकर उसी राज्य के महाराज पुरुरवा सामने दरबार आयी थी । लेकिन उसी दिन शाम तक उसी राज्य सभा में महाराज पुरुरवा को भी अपना कोई एक उत्तराधिकारी भी घोषित करना था ।

लेकिन उसी दिन कोई एक गिद्ध पक्षी भी शिकार की तलाश में घूमता हुआ आकाश में चक्कर लगा रहा था । क्योंकि उसी राजमहल के प्रांगण में व किसी एक भाग में एक रक्त वर्ण वाली महारानी की सगंमनीय व अत्यधिक चमक वाली चूडामणि भी रखी उई थी । महाराज पुरुरवा व महारानी दोनों ही उस चूडामणि के पास बैठे थे । लेकिन आकाश में चक्कर लगाने वाला वह गिद्ध उस चूडामणि को मांस का भाग समझकर ही एक झटके से उठाकर पुनः आकाश की ओर बडी ही तीव्रता (तेजी ) से उडकर चला गया ।

Moral Stories In Hindi | पुत्र की पहचान व परीक्षा

तभी राजा पुरुरवा ने उस चौर कर्म करने वाले उस पक्षी (गिद्ध पक्षी ) मारने के उद्देश्य से अपना धनुष वाण मगंवाए । लेकिन वह पक्षी आकाश में उडता हुआ पुनः दिखाई नही दिया । उस नगर के सभी पेडों (वृक्षों) की कोटरों में देखने के लिए नगर सैनिकों को भेजा गया । नगर मैं तथा उस राज्य के गाँवों में भी इस घटना में महारानी के चूडामणी हार के गिद्ध द्वारा ले जाने की सूचना करा दी गयी थी ।

लेकिन कुछ समय बाद ही कोई एक सेवक बाण के साथ उस मणि को लिए हुए राजमहल में राजा के सामने आता है । राजा ने उस चूडामणि को पानी से स्वच्छ कराकर व सावधानी से एक पेटिका में सुरक्षित रखने के लिए आदेश देता है । राजा उस बाण को बडे ध्यान से देखते हैं कि उस बाण पर तो उर्वशी से उत्पन्न पुत्र आयुष का ही नाम लिखा हुआ है । जिसको पढकर राजा स्वयं को पुत्रवान समझकर बहुत प्रसन्न होते हैं । लेकिन उस महारानी उर्वशी द्वारा पुत्र को इस तरह छिपाकर रखने के पीछे देवताओं का एक वरदान न मानकर मन ही मन में खुश भी होते हैं ।

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थोडी ही देर बाद ही च्यवन ऋषि के आश्रम से अपने साथ उस राजकुमार आयुष को लेकर एक तपस्विनी राज दरबार में आती है । सभी दरबारी मंत्रीगण व प्रजाजन के लोग आश्चर्य के साथ यह सब देखते हैं । राजा भी उस तपस्विनी को प्रणाम कर कुमार सहित दोनों का स्वागत करते हैं । उस तपस्विनी के कहने पर वह कुमार राजा पुरुरवा को हाथ जौडकर प्रणाम करता है तथा राजा के द्वारा पूछने पर बताती है कि महारानी उर्वशी ने इस कुमार को जन्म देने के बाद मुझे सौंप दिया था । तब से अपने आश्रम में च्यवन ऋषि ने इसके सभी संस्कार पूर्ण करके इस कुमार को युद्व कला से भी पारंगत करके व कुशलता योद्धा भी बना दिया है ।

आज इस कुमार ने देव पूजन के फूल , समिधा आदि लाते समय एक वृक्ष पर बैठे हुए एक गिद्ध को बाण से घायल कर आश्रम नियम विरुध कार्य करके यह चूडामणि सहित आपकी इस धरोहर को सौपने या समर्पित करने के उद्देश्य से मुझको यहांँ भेजा है ।

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इस प्रकार वह राजकुमार राजा पुरुरवा के समीप जाकर बैठता है । तभी उर्वशी को वहां बुलाया जाता है , उस समय उर्वशी राजा के पास धनुष -बाण सहित बैठे हुए बालक कुमार को देखकर समझ जाती है कि यही मेरा पुत्र आयुष है । इस प्रकार महारानी उर्वशी अपनी युवावस्था तक , पुत्र को सकुशल देखकर बहुत प्रसन्न हुईं । तथा अपने उस पुत्र को पिता की सेवा करने के लिए बहुत बहुत आशीर्वाद देकर स्वागत करने लगी।
इस प्रकार राजा पुरुरवा को अपना बिछुडा हुआ पुत्र सकुशल मिल गया था ।

शिक्षा ———————-
इस कहानी से हमको यह सीख मिलती है कि माता पिता अपने बिछुडे हुए पुत्र को उसके स्वभाव , गुणोचित कर्म के कारण पहचान ही लेते हैं । लेकिन बच्चों में भी अपने से बडे लोगों के प्रति मान सम्मान व सेवा की भावना होनी चाहिए ।

Author: Shayari_Love

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