मौत जीवन का आखरी पड़ाव है। ये एक ऐसा पड़ाव है जिस पड़ाव पर व्यक्ति कभी झूठ नहीं बोलता है। उस समय उसके मुंह से निकालने वाले हर एक लब्ज की कीमत होती है। हर एक आवाज उसके दिल से निकलती है। जब टूटे दिल की आवाज सीने से बाहर आती है । तो शायरी बनती है। तो हम आपके लिए ऐसी शायरी लाएँ है। जिसे लिखने वाले ने अपनी आखरी दिनों में लिखी थी। उसके कुछ ही दिनों बाद अपने प्यार के खातिर उसने खुद को मिटा दिया।
ए मौत तूने मुझे बहुत तड़पाया है ,
तुझसे मिलने लिए मैंने क्या क्या आमाया है ।
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रूक जाएगी जिस दिन सांसें मेरी
तो मेरी मौत समझ लेना ,
जमाने को दिखाने के लिए ही सही ,
कम से कम एक बार रो लेना ।
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जो मेरी नहीं हुई वो तेरी क्या होगी ,
जब मिलुंगा मौत से तो देरी क्या होगी ।
इंतजार कर रहा हूँ उस पल का वर्षों से ।
बिना आँखों के दुखुंगा, देखने में देरी क्या होगी
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बेवफाओं को गले लगाने से अच्छा है ,
मौत आ जाए ।
धोका मिलने से पहले
हमे ये सोच आ जाए ।
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मरने के बाद तो दुश्मन भी मातम मनाएंगे ,
अब तू क्या रो रही है मेरी मौत पर ।
हम जा चुके इस दुनिया से दूर ।
अब तो हम मौत का भी जश्न मनाएंगे ।
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तुम चाहों या ना चाहो हमे ,
पर हमारा दिल तो चाहता है ,
दुनिया में हसीनाएँ बहुत है,
हमे केवल तुम्ही भाता है ॥

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जीवन दिया ऊपर वाले ने ,
मौत दी नीचे वाले ने ,
आखर मरकर ही समझ आया मुझे ।
क्या रखा है इस पखाने में
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चाहे तू प्यार कर ,
चाहे इकरार कर ,
झूठे प्यार के वादे करके
ना तो मेरा शिकार कर ॥
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मन ही मन हम उसे भर लेते है अपनी बाहों में ,
हम तो मर ही चुके थे उनके प्यार में ।
वो शादी करके चली गई
हम भटकते रहे उनकी यादों की राहों में ॥
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हम दिल के बुरे नही थे ,
हमारी तो किस्मत खराब थी ।
मौत बनकर आई थी वो मेरे ज़िंदगी में ,
लेकिन वो मौत भी मेरे लिए लाजवाब थी॥
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हर दिन चीता पर कोई न कोई जलता रहेगा ॥
आज मेरे बारी तो कल तेरी बारी ,
ज़िंदगी का सफर यूं ही चलता रहेगा॥
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दुनिया में सबसे वफ़ाई करने वाली ही है, मौत
जो जीते जी आपके पीछे पड़ी रहती है,
मरने के बाद भी चैन की नींद देती है॥
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ठिकाना चाहिए दिल में आने के लिए
बहाना चाहिए दिल रुलाने के लिए ।
मौत का बहाना चाहिए सुलाने के लिए ॥
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वो मुझे देखकर इस कदर संवार गई ।
पसीना मेरे को आया वो निखर गई
यादों में छूता रहा उसे ।
हकीकत में छूआ तो तो टूटकर बिखर गई ॥
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तुम्हारे लिए मर गए है लेकिन
अभी हम जिंदा है ।
दिखा ना सके हम अपने प्यार को
इसलिए हम थोड़ा शर्मिंदा है ॥
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तेज आंधियां भी चट्टानों का कुछ नहीं बिगड़ सकती ,
तुम क्या हमे बर्बाद करोगी अ जानेमन ,
हमारा तो मौत भी कुछ नहीं बिगाड़ सकती ॥
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जख्मों से हमारे जमीन खून से तर हो गई ,
थे हम मौत के करीब ।
पर हमारे करन उनकी ज़िंदगी बेहतर हो गई ॥
एक सच ने हमे चोका दिया
जिदंगी ने हमें हर बार धोखा दिया ,
हमे सिकवा नहीं मौत से ।
मौत ने हमे कई बार मौका दिया ॥
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वो तो बेवफा है, कब तक जीते रहोगे उसका बोझ लेकर ।
क्या मिलेगा तुझे अपनी ज़िंदगी खोकर ॥
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हमे कुछ उम्मीद नहीं इस जमाने से ।
हमे कोई गम नहीं उसे भूलाने में ।
हम एक ही पागल थे इस जमाने में ।
क्योकि हमे मजा आता था उस बेवफा को चाहने में,
हमारा दिल जलता था उसे देखकर ,
कबख्त उसे मजा आता था हमे जलाने में॥
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किसी का सुख तो किसी का दुख जाताना पड़ेगा।
एक दिन हमे दुनिया को छोडकर जाना पड़ेगा।
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उसने हमे दर्द दिये और हम सहते गए ,
पुराने खंडर की तरह थे हम उनके साथ
वो नया बनती गई और हम डहते गए॥
तेरे से बढ़कर हमारा कोई यार नहीं था ।
इसलिए जिदंगी से कभी प्यार नहीं था ,
मौत तो एकदिन सभी को आनी है मेरे दोस्त
इसलिए मेरी साँसों पर मेरा अधिकार नहीं था॥
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दोस्तों क्या दिया है हमे इस बेरहम ज़िंदगी ने
धोके पर धोके मिले है प्यार की इस बंदगी में ॥
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हादसा ज़िंदगी का दूसरा नाम है।
मौत तो हादसे के नाम से बदनाम है॥
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मांगने से भीख भी नहीं मिलती।
तो प्यार की भीख कहाँ मिलेगी।
तू ज़िंदगी मांग रहा है, बेरहम जमाने से ,
यहाँ पर तो मांगने पर मौत भी नहीं मिलती॥
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मेरी मौत के बहाने लाख है ।
मगर जीने की वजह कोई नहीं ,
ज़िंदगी में तकलीफ बहुत है पर दर्द कुछ नही,
नमक लगाने वालेबहुत है घावों पर , पर हमदर्द कोई नही ॥
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जो ऊपर वाले को याद करने लग जाता है ॥
जो मौत से प्यार करने लग जाता है ॥
छोड़ आता है सारे सपने जीवन के ,
फिर वो नई खोज में लग जाता है॥
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उसे मेरी मौत का सदमा लगा है ,
उसकी आँखों से लहू बने लगा।
पहले मुझे देखतीतक नहीं थी वो
अब में उसे जान से प्यारा लगने लगा॥
दुनिया से दूर चले जायंगे छोडकर तेरा शहर
फिर भी तेरी याद आई तो हो जायंगे मिटते के ढेर।
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जब से हमने तेरी महोबत का जहर पीया है ।
कसम खुदा की, हमने एक पल भी चेन से नहीं जीया है॥
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ना जिदंगी भाती है ,
ना हमे मौत आती है ,
दिन भर उदास रहता है मन मेरा
हर वक्त तेरी याद आती है॥
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जी लिया जितना जीना था ,
पी लिया जितना पीना था।
जब मौत का पैगाम आया तो याद आया
की मुझे तो गैरों के लिए जीना था ॥
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कोई किसी के लिए नहीं मारता ।
हर कोई अपनी मौत मारता है ।
कोई किसी पर मारता है, तो कोई किसी के लिए मारता है॥
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दोस्ती बन गई है मतलब की ,
तो दो साथ कौन दे।
रिसते बन गए है बनावट के तो मुस्कान कौन दें।
फोटो बन गई है सजावट की तो यादें कौन दे।
बंधु बन गए स्वार्थ के तो साथ कौन दे॥

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जो सपने मे देखा ,
वो दिन आज आया है ,
मरनेका वक्त
बड़े दिनों बाद आया है।
मेरे मरने के बाद वो कमाल करेगी।
मिटाएगी मेरा नाम अपने हाथ से ,
फिर से वो अपने होठ लाल करेगी।
ढूंढेगी एक नया शिकार तरकस में
अब किसी नए को कंगाल करेगी॥
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