Bhrashtachar status in hindi भ्रष्टाचार पर स्टेटस, दोस्तों आज हम आपको भ्रष्टाचार पर तंज़ कसने वाले कई स्टेटस देने वाले है। उम्मीद है की आपको ये सभी स्टेटस पसंद आएगे । अगर आपको स्टेटस अच्छा लगे तो आप इन स्टेटस को अपने दोस्तों को भेज सकते है। या कोई व्यक्ति आपको सरकारी नौकरी लागने के बाद महत्व नहीं देता है। या आपकी इज्जत नहीं करता है। तो आप उसे बिना नाराज किए हुए सीधे स्टेटस के माधायम से उस पर तंज़ कस सकते है।
आज तक जिनती भी क्रांती हुई है
उनमे सरकारी अधिकारियो का कोई हाथ ना था ..
आज तक जिनती भी क्रांती हुई है,
उनमे सरकारी अधिकारियो का कोई हाथ ना था।
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सरकारी सिस्टम में बैठे लोगों का एक ही काम होता है
जनता को दबाये रखना , उसके मन में चल रहे क्रांति को शांत करना..
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तुम तब तक सिस्टम को बदलने की सोचेंगे
जब तक तुम सिस्टम से बाहर हो ,
सिस्टम में आते ही तुम उसी का एक हिस्सा बन जाओगे ..

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सरकारी सिस्टम को केवल,स्वार्थी डरपोक
और फट्टू अधिकारी चाहिए ,
जो केवल सरकारी आदेश का पालन करे
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बड़े से बड़ा घोटाला सरकारी ही क्यों होता है
प्राइवेट सेक्टर में क्यों नहीं होता ..
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भ्रष्टाचारी दो तरह की भाषा समझते है
एक तो पैसे की दुसरी लठ की ..
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देश की आजादी में भाग लेने वालों में एक भी सरकारी आदमी नहीं था
तो फिर आज आजादी के अवसर पर ये बड़े अधिकारी हमारे मुख्य अथिति क्यों होते है ..
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सिस्टम को और देश को केवल गैर सरकारी
लोग ही सुधार सकते है ..
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तुम कहते हो सरकारी लोगो को मिलने वाली पेंसन बंद हो जानी चाहिए
बंद करने का कानून कौन लाएगा ,सरकारी आदमी या प्राइवेट ..
तुम कहते हो सरकारी लोगो को मिलने वाली पेंसन बंद हो जानी चाहिए,
बंद करने का कानून कौन लाएगा सरकारी आदमी या प्राइवेट
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वकीलों और जज का पैसा ही अपराध है
क्या ये चाहेंगे की अपराध ख़तम हो ..
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जज को रोजगार वकीले से
सकील को रोजगार जज से ..
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जज अरु वकील किसी के नहीं होते ,
ये सिर्फ पैसे के गुलाम होते है ..
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जज को इन्साफ करने में कई साल लग जाते है
जबकी हकीकत सबको दिखती है
लेकिन जज को क्यों नहीं दिखती ..
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कोर्ट में चलने वाले 99 केस फेक होते है
और कोर्ट में पेस जिए जाने वाले सबूत तो 100 झूठे होते है ..
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100 फिट से निचे के पहाड को ये अरावली नही मानेंगे ये जज
तो 50000 से कम पैसे कमाने वाले को इंसान कैसे मानेंगे ..
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कानून और नियम केवल
गरीबो के लिए ही बने है ..
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कानून हमेशां कमजोर और
गरीबो के लिए लागू होते है ..
आज तक जीतने भी कानून लगाए गए है वो हमेशां,
कमजोर और गरीबो पर लागू लागू होते है ..।
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हमारे यहाँ पैसे से बेल मिल जाती है
अगर ना हो जेब में पैसे तो जेल मिल जाती है..
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कोर्ट को इन्साफ का मंदिर कहा जाना सही है
जिस प्रकार मूर्ति के सामने तुम कितने ही गीडगीडाओ
उसे कोई फर्क नै पड़ता , उसी प्रकार जज को ही कोई फर्क नहीं पड़ता..
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कोर्ट हमेसा सबूत मांगती है
सबूत तो अपराधी के पास होते है
क्योकि उसे तो पहले ही पता है की क्या अपराध करना है..
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कोर्ट में सिर्फ पैसा चलता है इंसान है
तुम पैसो के दम पर बेल ले सकते हो ..
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जिस दिन लोग कानून से डरना छोड़कर
कानून की इज्जत करने लगेगे उस दिन देश में शांती आ जायेगी ..
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सरकार का काम है अपराधी को बचना
अपने सूना होगा चोर चोर मोसेरे भाई ..
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रोबिन हुड कभी सरकारी नहीं हो सकता ..
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सरकारी नोकरी में पद के अनुसार तनख्वाह फिक्स होती है
काबिलियत के अनुसार नहीं .
जबकी प्राइवेट नोकरी में काबिलियत के अनुसार तनख्वा मिलती है पड़ के अनुसा नहीं ..
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जब तक तनख्वाह काबिलियत के आधार पर नहीं दी जायेगी
तब तक ये सरकारी सिस्टम कभी नहीं सुधरेगा
ये कभी नहीं होगा ,क्योकि कोई ऐसा नहीं है जो अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारे ..
Bhrashtachar status in hindi भ्रष्टाचार पर स्टेटस
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ईमानदारी का पाठ वही पढ़ते है जो खुद बेईमान है
क्योकि ईमानदार को ढिढोरा पीटने की जरुरत नहीं होती ..
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शोक तो बेईमानी के पैसे से पुरे होते है
इमानदारी से तो घर भी नहीं चलता ..
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जो लोग लग्जरी लाइफ जी रहे है उसे पैसे की कद्र नहीं
इसका मतलब पैसा ईमानदारी का नहीं है..
शोक तो बेईमानी के पैसे पुरे होते है,
इमानदारी से तोघर भी का कोई नहीं चलता .।
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ईमानदारी और कर्मनिष्ठा ये
सब गैर सरकारी लोगो के लिए होते है ..
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विदेश में राष्ट्रिय्पती इस्तीफे के बाद
बाजार में सबिजी खरीदते हुए दिख जाएगा
यमारे यहाँ एक बार सरपंच का चुनाव जीतने के बाद भी
बीस साल तक गाडी के पिच्छे भूतपूर्व सरपंच लिखा रहता है ..
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एक दिन सब को मर जाना
क्या पैसा साथ में जायेगा
ये सब डाइलोग पैसे बटोरने के लिए है ..
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गरीब साथ पैसे के अलावा और कोई नहीं दे सकता
अगर देना है तो गरीब को ज्ञानं नहीं पैसे दो …
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रिश्वत का आदत मरते दम तक नहीं छोट्टी
इनका बस चले तो भगवन को रिश्वत देकर अपनी उम्र बढ़वा ले ..
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गरीबों के कल्याण के लिए ज्ञान बाँटने वाले ही
सबसे ज्यादा गरीबों का हक़ मारते है ..
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एक इंसान गरीबों की स्थिति को सुधारने के लिए सिस्टम में जाता है
पेट भरते ही वो सब कुछ भूल जाता है ..
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गरीबों की याद जब तक आती है
जब तक पेट खाली हो
पेट भरते ही नींद आ जाती है ..
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तुम एक ऐसा नाम गिनवा दो
जिसने आजादी में सहादत दी थी
जो नौकर या अधिकारी था ..
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आजादी मिलने में सबसे बड़ा रोड़ा अंग्रेज नहीं
हमारे सरकारी तनख्वाह पाने वाले सरकारी नौकर थे ..
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अगर भ्रष्ट अधिकारि को सुधारना है तो
अपने पास तेल लगाया हुआ लठ रखो ..
अगर भ्रष्ट अधिकारि को सुधारना है तो,
अपने पास तेल लगाया का कोई हुआ लठ रखो .।
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सरकारी नौकरी में नेताओं को
सिर्फ डरपोक और स्वार्थी लोग चाहिए ..
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जो सरकारी अधिकारी अपने दफ्तर में इतने स्वार्थी है
वो देस के बारे में क्या ही सोचेंगे ..
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बड़े पद को पाने के लिए जो अपने मा बाप को छोड़ सकता है
वो किसी देश का कैसे हो सकता है ..
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क्या अपने सूना है की कोई जन सेवा के लिए
अपनी पढाई पर करोड़ों खर्च करता हो ..
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आज जो अपनी पढाई पर लाखों लगा रहा है
वो करोड़ों कमाने के लिए है ..
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भ्रष्टाचार तभी होता है
जब इंसान का पेट भरा होता है
तो सरकार इन्हें इतनी तनख्वा देती ही क्यों है
की भ्रष्टाचार करना पड़े ..
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सरकारी नौकरी में इतनी ज्यादा तनख्वाह इसलिए होती है
की क्योकि सरकार पर बेरोजगार का प्रेसर ना हो
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जो लोग सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे है
उन्हें बेरोजगार कि श्रेणी में सामील कर लिया जाए तो
बेरोजगारी की डर क्या होगी ..
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जितने लोग सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे है
उनमे से भरती वाले पदों को हटाकर देखों
कितने लोग बेरोजगार है ..
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कम तनख्वाह वाला व्यक्ति कभी भ्रस्टाचार नहीं करता
जिसका पेट भरा हो वही भ्रष्टाचार करता ..
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सरकारी नौकरी सभी को इसलिए अच्छी लगती है
क्योकि इसमें ऊपर की कमाई है ..
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अपनी लड़की के लिए अच्छा इंसान नहीं बल्की
अच्छा कमाने वाला चाहिए ..
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जिसके पास सरकारी नौकरी है
उसके सारे अवगुण छुप जाते है ..
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हम तब तक सिस्टम को गाली देते है
जब तक हमारे घर का कोई व्यक्ति सिस्टम में नहीं आता ..
हम तब तकसिस्टम को गाली देते है,
जब तक हमारे घर का कोई व्यक्ति सिस्टम,
नहीं आता1 1।
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हम सिस्टम को बदलने के लिए सिस्टम में आते है
लेकिन कुछ दिनों बाद सिस्टम हमें बदल देता है ..
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जिस जिस को सरकारी नौकरी पसंद है
उसकी मानसिकता भ्रष्टाचारी की है ..
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सरकारी नौकरी चाहने वाले का मुख्य टारगेट
भ्रष्टाचार का मौक़ा है ..
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सिस्टम में रहकर जो व्यक्ति कहता है
की मैंने आज तक कोई बेईमानी नहीं की
इसकी दो वजह हो सकती है
या तो उसे भ्रस्टाचार करने का मौक़ा नही मिला
या वो डरपोक है ..
सिस्टम में रहकर जो व्यक्ति कहता है की मैंने आज तक कोई बेईमानी नहीं की,
इसकी दो वजह हो सकती है या तो उसे भ्रस्टाचार करने का मौक़ा नही मिला।
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डॉक्टर बोलने में भगवान का दुसरा रूप है
मगर वास्तविकता में वो काल भैरव है ..
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नेता सिस्टम को इसलिए नहीं सुधार सकते है
क्योकि सिस्टम और कोई नहीं वो खुद है ..
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जो नेता खुलकर बोलता है
तो इसका मतलब है वो साफ़ सुथरा है
जो नेता चुप चाप है इसका मतलब है की
वो पैसे एकत्रित कर रहा है ..
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बोलने में बजट भले जनता के लिए है
पर वो बजट नेता और उद्योगपतियों के लिए होता है ..
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कानून और नियम सिर्फ
गरीब लोगों को दबाने के लिए होते है ..
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क्या गरीब लोग ऐसे कानून की इज्जत करेंगे जिसमे
मुजरिम को पैसे के दम पर जमानत मिल जाये..
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जो जज लोगों के लिए नयाय का देवता है
वो खुद अपने ही घर की बहु को मारता पीटता दिख जाएगा ..
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यहाँ पर महिला कल्याण मंत्री वही बनता है
जिसमे पर महिला जिस्म्फरोसी का केस चल रहा हो ..
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जिस समय में पढता था उस समय सरकारी
स्कूल की स्थिति जैसी थी ,आज वैसी इ वैसी ही है ..
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भले आज देश कितना ही प्रगती कर ली हो
पर आज भी लोग दवाई के अभाव में मर जाते है ..
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