katil aankhen shayari कातिल आँखों पर शायरी , हम आपको ऐसे सफ़र पर लेकर जा रहे ही जहाँ पर , मोहब्बत और जुनून के सफ़र पर… तो तैयार हो जाइए “कातिल आँखें” की गज़लों और शायरी के दीवाने होने के लिए! “कातिल आँखों का जादू ऐसा, दिल को बना दे बेकरार और आपका दिल ही शायरी लिखने और शायरी का शोकिन हो जाएगा . दोस्तों आँखों की भाषा ऐसी होती है जो बिन बोले ही बहुत कुछ कह जाती है . कई लडकियों की आंखे इतनी कातिलाना होती है . पहली नजर में हमे प्यार हो जता है . तो लडकी की तारीफ़ में कई प्रकार की शायरी बनती है . तो चलिए दोस्तों शायरी का मजा लेते है . कातिल आंखों वाली शायरी .. katil aankhen shayari
कुछ क़त्ल करते है तिरछी आँखों से
तो कुछ क़त्ल करती है मीठी बातों से
वो कमबख्त बार बार खेल जाती है मेरे जज्बातों से ..
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कातिल आँखों से कमबख्त क़त्ल कर गई
में जिस पर मरता था वो किसी और पर मर गई
उसे बिलकुल लजा ना आई
जिसे वो पाना चाहती थी कमीनी हासिल कर गई ..

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भरोसा मत करना कातिल निगाहों पर
में जिसे प्यार करता था
वो छोड गई मुझे बीच राहों पर ..
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निगाहों से जब क़त्ल करती है तो आवाज नहीं आती
कहने पर नहीं मिलने आती , कम्बखत मुझे खूब सताती ..
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तूने मुझे लूट लिया इन तीरची नज़रों से
कर गई पागल मुझे फूलों वाले गजरे से ..
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लगता है मुझे तेरी काली नजरो में कुछ राज है
कहो या ना आ तेरे लबों पर कोई साज है
यूँ ही नहीं है तेरे पीछे ये दुनिया पागल
तेरे जीने का अनोखा अंदाज है ..

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झुकी हुई कातिल नज़रों को हम प्यार समझ बैठे
दिल दे दिया बिना सोचे समझे
हम तुझे अपना संसार समझ बैठे ..
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कल तक वो मझे छोड़ने के बात कर रही थी
आज वो कमबख्त मेरी कब्र पर जाकर रोती है
मुझे आप पता चला की सच्ची महोबत इतनी गहरी होती है ..
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कल तक वो मेरा साथ देने का वादा कर रही थी
वो मेरी हर एक बात पर मर रही थी
आज मेरे बुरे दिन क्या आये
वो तो मेरे साए से भी डर रही है ..
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कुछ दिल के जज्बात कागज़ पर लिख लेते है
हमें बिलकुल भी प्यास नहीं है आज
जब है होगी तब नजरों से चख लेते है ..
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हम है प्यार से हारे हुए हमें आज भी याद है
उस कातिल नज़रों वाली को में भुला ना सका
मिट गए शरीर के जखम पर दिल पर घाव आज भी है..

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वो कातिल निगाहें वो मासूम अदाएं
मेरा सब कुछ लूट कर ले गई
मुझे याद आती है उसकी वफाये..
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दिल मेरा लूट लिया उस कातिल निगाओं वाली ने
सब कुछ लूट लिया उस दिल की काली ने ..
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हम दिल का क़त्ल करवाने को तैयार बैठे है
दिल को खोदने का औजार लिए बैठे है .
उस कातिल निगाहो वाली के लिए
मरने के लिए तैयार बैठे है ..
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उसे देखकर क़त्ल हो जाने को जी चाहता है
उसके प्यार में मर मिटे को जी चाहता है ,
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उसके आँखों में नशा और होठो पर जाम है
उसकी खूबसूरत आँखे का क़त्ल करने का कम है ..

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वो खूबसूरत है चाँद जैसी
दिल में आती है उन्माद जैसी
क़त्ल किया उसने मेरे द्दिल का
दिखने में लगेई वो सांझ जैसी ..
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मेरे दिल पर उसकी बेत्ताबी का आलम था
आर पार हो गया मेरे सीने से
वो नजरों का तीर बड़ा जालिम था..
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गजब का प्यारा ये नजारा है
वो जो आँखों से क़त्ल कार्टी है
उसका वो स्टाइल बड़ा ही प्यारा है ..
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जाम पे जाम पीये जा
और तुझसे कुछ ना होगा शराबी
तू तो महबूब की आखों से और पीए जा ..
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आज के मौसम में कुछ खराबी थी
उसके होठ थोड़ी शराबी थी
वो तो बस नखों से क़त्ल करती
लगता है उसके दिल में कोई खराबी थी ..

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ना दर्द ह़ा सीने में
ना दुःख महसूस ह़ा जीने में ..
आँखों से तुने ऐसी पिलाई
फिर ना मजा आया दारू पीने में ..
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क्या करीं उसकी आँखों की तारिफ
क़त्ल उसे हमारा किया
मैंने सोचा होगीए बेवफा
अब क्यूं जनाब की आँखों से आ रही बारिशें ..
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घाव ऐसा दिया की हम उसे सी ना सके
पीना तो बहुत चाहा मगर उसके बिना ना पी से
भले उसने दिल तोड़ा है मेरा
फिर भी हम उसके बिना ना जी सके ..

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न तो मौसम में बेताबी है
ना कोई मौसम में खराबी है
हम क्या करें जनाब
हमारा तो दिल ही शराबी है ..
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हम प्यार तुमसे करते है हभी हमारे साथ बढ़ लिया करों
हमारी आँखों में प्यार छूपा है इसे भी बढ़ लिया करों ..
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जबसे तेरी आँखों ने शरारत की
तभी से मेरे दिल ने बगावत की ..
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दिल उसका बड़ा कमजोर था
पर मेरे दिल में शोर था
करूंगा तो उसी लडकी से शादी
मुझे क्या पता उसके दिल में कोई और था ..
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जनाब छोड़ को कातिल आखों की तारीफ़ करना
जीना हराम कर देगी ये
इको आटा है बेमौसम बारिस करना ..

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उसकी बड़ी थी ख्वाइसे
हम पुरी ना कर सके उसकी फरमाइसें
वो हमें आखों से क़त्ल करके चली गई
हम करते रहे प्यार पाने की गुजरीसें ..
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दो पल की जिन्दगी है दो पल का ठिकाना
उसकी आखों से बचके रहना
भूलकर भी उसकी आँखों से मत टकराना ..
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हमारी दुशमन है ये बड़ी बड़ी इमारतें
हमारा क़त्ल कर गई उसकी आँखों की शरारतें ..
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उसकी आंखें है कातिलाना
उसकी अदा है फिसलाना
भूलकर भी दिल ना लगाना उससे
नहीं तो दिल को पडेगा तड़फाना ..

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आंखे कजरारी और आँखों का रंग गहरा था
पगली ने उसी का क़त्ल कर दिया
सर पे जिसके सेहरा था..
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प्यार नहीं तो साफ़ साफ़ कह दे
धोका देकर दिल क्यों दुखाती हो
भुलाता हूँ बार बार , फिर मेरे
दिल को बार बार क्यों रुलाती हो ..
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हम समझ नहीं पाए उसकी कातिल आँखों को
आज चूम रहे है . मेरे हाथों को
कल कहती थी मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता है
आज याद कर रही है मेरे जज्बातों को ..
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कभी ना टूटेगी यह खुमारी अपनी
इसी तरह मस्त चलेगी जिदगी हमारी
आँखों से क़त्ल मत कर देना
वरना बखर जायेगी जिदंगी सारी की सारी..
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देखकर तेरी कातिल आँखों को में राहें भूल गया
में आजाद हो गया पिंजरे से पर में अब उड़ना भूल गया..

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तू तो खुद को सजाये रखती है
ये कातिल आंखे हमें बचाए रखती है
आ हमें ये जेई देती है ना ही मरने देती है
ये हमें इसी तरह सताती रहती है..
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मेरा दिल दरिया की तरह रुका हुआ है
मेरे सामने तो समुन्दर भी झुका हुआ है
तेरी कातिल आँखों के सामने मेरा बस चलता नहीं
तेरी नजरों के सामने मेरा सब कुछ झुका हुआ है ..
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कातिल आँखों से शुरू हुआ इसक
लबों पे ख़तम हो गया
हम तेरे प्यार में के नसे में जीते रहे
हमें क्या पता हमारे साथ क्या क्या हो गया ..
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घुंघट में पता नहीं चलता आँखों की वफाओं का
हम तो चेहरा देखकर बता देते है क्या हाल है बेवफाओं का ..
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कातिल आँखों में अन्धेरा घनघोर था
चेहरा उसका चाँद चकोर था
हम ही थे उसके प्यार में पागल
उसके दिल में कोई और था..

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वो आँखों से हर रोज क़त्ल ए आम करते है
हम वो आशिक है जो प्यार उन्हें सुबह शाम करते है..
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तेरी आँखों ने हर दर्द को छुपाया
तेरी कातिल आँखों ने हमें खूब रुलाया
ज़िंदा था तो पूछती तक नहीं
आज मेरी कब्र पर क्यों रोने आया..
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ये सुन्दर जिन्दगी थी
ये किसी की बंदगी थी
हम उस कातिल आँखों वाली से प्यार
कर बैठे जो किसी और की जिन्दगी थी..
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कई आशिक आम होते है
कुछ आशिक बेईमान होते है
जो आँखों से क़त्ल करे
वही कातिल इंसान होते है ..
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प्यार ना कों किसी की सूरत से
क्या पता वो प्यार करती होगी अपनी जरुरत से ..
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वह मुझ्से ज्यादा प्यार अपने आप से करती थी
मुझे प्यार चुप छुप कर करती थी
क्योकि वह अपने बाप से डरती थी ..

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तूम गुल के गुलाब जैसी हो
तुम तो पुरानी शराब जैसी हो
हो किसी की आंखे तो
कातिल आप जैसी हो ..
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अब दिल को नहीं है सब्र
कातिल सामने आना चाहता है
भले बन जाए मेरी कब्र
ये ताबूत जन्नत जाना चाहता है ..
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आधे जज्बात दिल में रह जाते है
वो लबो से कुछ नहीं कहते
मगर आँखों से बहुत कुछ कह जाते है..
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तेरी आँखों का काजल बहुत गहरा है
तेरे चहरे पर जुल्फों का पहरा है
कमबख्त गाल चूमने ही नहीं देती
तुमको इन जालिम जटाओं ने घेरा है..
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गुमनामी में बस तू जीए जा
मस्त होकर यूँ ही पीये जा
बस जा उसके जिगर में
बस दिल में छेद किये जा ..

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जुबान पर टाला लगा सकते है पर नजरों पर नहीं
आप मुझे भुला सकते है पर मेरे जज्बातों को नहीं ..
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ना दिल में जूनून है
ना दिल को सुकून है
जब से जिन्दगी में तू आई
मेरे दिल में खून ही खून है ..
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ना तू कभी ट्रेन से आती है
ना नींद चेन से आती है
जब भी मिलने को आती है
पगली देर से आती है..
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हमे किसी बात का खेद नहीं
चाहे नज़रे तुम्हारी कातिल हो
लड़कियां बड़ी चालक होती है
देती नहीं दिल का भेद कहीं ..
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खुद को सजाये रखती हो कातिल निगाहों से
अपने आशिको को सताया करती हो गोरी बाँहों से
हो जाता हु पगाल तेरी जुल्फों को देखकर
दिल नहीं लगता तेरी सदाओं से..
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तेरी निगाहों को देखें हो गया अर्षा
जब भी मेरा नाम लेती है
तेरी आँखों से होने लगती है वर्षा ..

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तू तो सोने पे सुहागा है
मेरे प्यार का पक्का धागा है
तुझे पाकर भी ना पा सका
मेरा दिल कितना अभागा है ..
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तेरी आँखों ने ये कैसा खेल किया
ना जाने प्यार में कितनों को रेल दिया ..
जो भी करता था तुमसे प्यार
तेरे यार ने सबको पेल दिया ..
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प्यार का पढ़ा हमें ना पढ़ाया कर
अगर मिलना तो सही समय पर आया कर
कातिल आंखे दिखाकर सबको ना सताया कर ..
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कुछ फैसले कातिल आंखे करती है
कुछ फैसले जेल की सलाखें करती है ..
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बिखरेगा जब तेरे गलों पर आँखों का पानी
उस दिन याद आयेगी मेरी प्यार भरी कहानी ..

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देदे किसी गरीब को अपना दिल
बेकार मत कर अपनी जवानी
बसा दे किसी का घर बन जा किसी की रानी ..
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कातिल आंखे दिल आ अरमान ले गई
हम तो नींद में थे बगीचे का बोलकर समसान ले गई
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खुशियों की गहराई कोई नहीं नाप सकता है
कातिल आँखों के प्यार को कोई नहीं भांप सकता ह..
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मुर्दे को ज़िंदा कर देती है ,
बुढापे में जवानी भा देती है
तेरी कातिल नज़रे
ना जाने क्या क्या कर देती है ..
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एक छलकता जाम है तू
कातिल आँखों वाली शैतान है तू
तुझे क्या दोस्ती करूँ में
चलता फिरता शमसान है तू ..

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चख ली शराबसारी हमने
तेरी कातिल आँखों के सामने फेक दी बोतल हमने ..
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दिल या बड़ा बेताब है तेरी कातिल आँखों से
हमने सारी दुनिया को महसूस किया तेरी सांसों से ..
आप ये शायरी भी पढ़ सकते है …..
कातिल आँखों पर शायरी कातिल आँखों पर शायरी

