कबूतर पर मजेदार शायरी जो याद दिला देगी उनकी

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kabutar par shayari, kabootar par shayari . दोस्तों वैसे देखें तो शांति और प्रियतमा का संकेत है. शायरी हमारी जिन्दगी का शार है. अपने भावों को एक लयबद्ध तरीके से पेश करने के तरीके को शायरी कहते है. आपने देखा होगा की बहुत से लोग kabutar को पलते है. पुराने समय में तो kabutar दूत का काम करते थे . हर शयर या कवियों ने कबूतर पर अपने दिल के अल्फाज लिखे है . किसी इ गम में लिखे है तो किसी ने ख़ुशी के मरे कबूतर पर अपने विचार लिखें है . तो दोस्तों हम आपके लिए अपने दिल के अल्फाजो को शायरी में पिरोकर आपके सामने पेस करते है. आप अपनी मनपसंद शायरी को अपने प्रेमि या दोस्त के साथ साझा कर सकते है.

यूँ तो बेजान परिंदा हूँ ,

बस कुछ ही लोगो के

अहसान पर ज़िंदा हूँ..

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कबुतरो की आवाज कभी सुनी होगी

ये बेरुखी जिन्दगी तूने चुनी होगी

क्या होता है बिछुड़ने का दर्द

प्यार की ये दस्ता कभी सुनी होगी..

कबूतर पर शायरी

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हम कबूतर है जनाव आजाद रहना पसंद करते है

इस जगत में होते है इतने बेरहम इंसान

जो हम कबूतरों को पिंजरे में बंद करते है..

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एक जंग हम भी लड़ेगे

हम इन इंसान पर टूट पड़ेगे

मरते मरते हम तुझे भी ले मरेंगे ..

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दूसरों की दुनिया बर्बाद करके

कब तक रहोगे तुम आबाद

मत खुश होना अपनी जिदगी पर

एक दिन तुम भी हो जाओगे बर्बाद ..

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कबूतरों का दर्द कोन जानता है

हमें अपना कौन मानता है

जब हम कीसी के होना चाहते है

हमें कौन पहचानता है ..

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पाखियों का दर्द कौन जानेगा

बुरे कर्म लौटकर आते है

खुद पर बीतेगी जब तुम जानेगा..

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आशियाना हमारा छीन लिया

हमें ख़ूब जलील किया

मौत के लिए खुदा से मन्नत की

जन्नत में अपना मौत मांग लिया ..

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कबूतरों की मासूम आवाज सुनकर

याद आती है मुझे लूटी हुई दुनिया

हम भी कभी ऐसे ही हुआ करते थे

लूट गया संसार सुनी हो गई मेरी दुनिया..

kabootar wali shayari

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जब कबूतर दुनिया छोड़ देंगे

तन इन्शान खुद से रिश्ता तोड़ देंगे..

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ना किसी से दोस्टी रखते है ना किसी से वैर रखते है

हम तो खुदा के बन्दे है , हम तो सभी की खेर रखते है..

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तेरे लिए में आँगन का कबूतर बन जाऊं

तुम्हे पाने के लिए में सब गमाऊ

तेरा प्यार पाने के लिए तेरा गुलाम बन जाऊं ..

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उड़ने दे मुझे खुले आसमान में

जैसे परिंदा उड़ता है अपनों की छाव में ..

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वो कहती थी कबूतर को प्यार नहीं होता

एक बार आंखे खोलकर तो देख उसकी तरफ

तेरी तरह उसका जीना बेकार नहीं होता..

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असली इन्शान वही है जिसका घर संसार है

असली जीवन उसकी का नाम है जिसे कबूतरों से प्यार है..

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दूसरों का घोसला उजड़ने वाले लोग बड़े बेरहम होते है,

जिनको दया आती नहीं किसी पर ही ओ इसान बड़े बेशरम होते है ..

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बात गरूर की करूँ तो पहला नाम इन्शान का आता है

बात प्यार की करूँ तो कबूतर का नाम मन को भाता है..

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कबूतरी बनके चहचहाया कर

दिल लगाकर किसी को ना बहकाया कर ,

आशिक हो जायेगी तेरे को किसी से

हर किसी से नजरे न मिलाया कर ..

kabootar shayari in hindi

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लेकर तुझे उड़ जाऊं खुले आसमान में

खुलकर जीने की तमन्ना होती है हर इंसान में ..

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गांव की की गलियों में जब वो मिला करते है

हर रोज वो मुझसे गिला करते है

जब पांच दिन बाद मिलूं उससे तो

दिल में उसके गुलाब खिला करते है..

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जब देखूं किसी और की तरफ वो मुझे खूब डांटते है

जब जूठ बोलूं उसके सामने तो मेरे हाथ कांपते है ..

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हम कबूतर है जनाब हम तो आशिको की चिठ्ठी बांटते है

हम से ना रखना ख़ुशी की उम्मीद हम ख़ुशी के साथ गम भी बांटते है..

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दिल करता है की में कुछ कर जाऊं

अपने प्यारे साथी के लिए मर जाऊ

जब आता है अपने परिवार का ख्याल

तो मौत के नाम से भी डर जाऊं ..

kabutar shayari

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हम पंछी है जनाव सितारों में छीप नहीं सकते

किसी के यहाँ हम रुक नहीं सकते

हम से सभी नफरत करते है

हम तो खुदा के आगे ही झुक नहीं सकते ..

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क्यों काटते हो जंगल इनसे तो पहचान है अपनी

हरे पेड ना काटो जनाब ये तो जान है अपनी..

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जंगलों को काट दिया

अपने घरो को उजाड़ दिया

बने बनाये घोसलों को

इन बेरहम इन्शानो ने उखाड़ दिया..

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जंग जाहते है तो दंगल में जाओ

शांति चाहिए तो जंगल में जाओ

पेड़ काटकर खुद को तीस मर खा समझते हो तो

जंग चाहते है तो बीच अखाड़े में आओ

हम बेजबान को ना सताओ ..

kabotar shayari

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भाषा तो अपनी भी है कोई समझ नहीं सकता

दिल तो अपना भी है , इसमें कोई बस नहीं सकता ..

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कबूतर की तरह उडना चाहता हूँ

पिंजरे के बंधन से दूर कहीं,

चाहकर भी नहीं जा सकता तुझसे दूर कहीं ..

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दिल उसका साफ़ था

तभी तो हर कोई उसके खिलाफ था

साथ देना चाहता था में भी उसका

पर क्या करूँ मेरा दिन भी ख़राब था ..

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कबूतरों को ओज दाना डालने वो रोज जाया करती थी

वो मुझे देखकर रोज मुस्कुराया करती थी ,

मुझे पता नहीं था वो किसी और को चाहा करती थी,

में सोचता था की वो मुझ पर मरती थी..

kabootar par shayari

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कबूतरों के संग मत जाया करो

बेवजह मत मुस्कुराया करो

कोई बेगुनाह मरा जाएगा

यूँ अकड़कर सामने से ना जाया करो..

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कबूतरों के संग दोस्ती तेरी

जान ले लेती है मेरी

जब तु जाती है किसी गिर के साथ

साँस अटक जाती है मेरी..

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बयां कैसे करूँ दिल के दर्द को ,

हम कबूतर है जनाब इसलिए दर्द होता है

आजकल दर्द कहाँ होता है मतलबी मर्द को ..

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मौसम का हाल बुरा है

कौन कहता ही ये इन्शान बुरा है

थाम के तो देख एक बार हाथ उसका

फिर अहेगी वो मेरे बिन अधूरा है..

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कबूतरों को ही दर्द होता है

दिन रात अपने परिवार के लिए मेहनत करता है

वो और कोई नहीं घर का मर्द होता है..

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कबुतरो का दर्द समझकर तो देख

दुःख के दरिया में उतरके तो दख

क्या क्या झेलना पड़ता है इस बदहज इन्दगी में

दो जाम मेरे सह पीकर तो देख ..

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तनहा रहते हुए वो कभी बोर होते नहीं

जब में बोलता हूँ बात करने को तो डर लगता है उनहे

चली जाती है हर किसी के साथ , वो ओ खुले जंगल में भी खोती नहीं ..

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कबूतर बेवजह रोते नहीं

सुखी हुई डाल पर वो सोते नहीं

लाख कौशिश करो वेवफा के सामने

वो चाहकर भी हमारे होते नहीं..

pigeon shayari

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अगर कबूतरों का दर्द समझ में आये तो कहना

कैसा होता है पंख होते हुए भी पिंजरे में रहना..

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मेरी चोंच में था एक दाना वो कोई और ले गया

प्यार के खातिर में अनगनित दर्द सह गया

सोचा था एक दिन वो प्यार कर लेगी मुझसे

इन्तजार करते करते , अंत में चिता पर सो गया..

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तिनका तिनका जोड़कर आशियाना बनाया था

उसके साथ घर बसाने का सपना सजाया था

लूटकर ले गई वो सब कुछ मेरा

कई साला पहले मेरे जीवन में ऐसा दौर आया था..

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इन्शानों ने बेपनाह जुल्म किया कबूतरों पर

खुद मौज करते है बैह्कर इन चबूतरों पर ..

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दिल से दिल्लगी मिटाई नही जाती

कबूतरों से दोस्ती हर किसी से बनाई नहीं जाती ..

दिल करता है भुला दूँ उसे

पर दिल से उसकी याद भुलाई नहीं जाती ..

कबूतर पर स्टेटस

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धोका देना सिर्फ इन्शानो की फितरत नहीं

धोक्का जानवर भी देते है

अनजाने में किसी का दिल नहीं टूटता

लोग सब कुछ जानकर धोका देते है..

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कुछ कबुतर तो दिल की आवाज होते है

कुछ टूटे दिल के राज होते है

कुछ लोगों के हम भी फेन है

उनका जीने का अनोखा अंदाज होते है..

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जख्म हमें भी लगता है

हम किसी को दिखाते नहीं

करके हु हाला बेवजह किसी को सताते नहीं..

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दिल के दरिया को बहने दो

दिल की बात आज कहनो दो

तुम क्या मुझसे प्यार करती हो

तुम्हेरी तो बाद अलग है

तुम तो रहने ही दो..

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थोड़ा सा गम में जी लेने दो

दो घूंट नशे के पी लेने दो

हम कबूतर है जनाव

दो पल हमें भी जेई ली दो ..

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तूफानों से लड़ता हुआ मैंने एक कबुतर देखा

बिन उमीदों के इजरे में सड़ता कबूतर देखा..

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हवाओं ने रास्ता रोका बादलों ने डरा

पर वो कबूतर लगातार आसमान चीरता गया

न उसकी उम्मीद टूटी ना उसे डर सताया ..

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तूफान कहता था , तू मुझसे नहीं लड़ पायेगा

मुझे हराने में तू सब कुछ लूटा जाएगा..

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दिल में डगर न हो तो कबूतर भी कबूतर ना होगा

दिल में जिगर ना हो तो दिल दिल ना रहेगा..

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बात यारो जिगर की होती है

वरना कबूतर ही शेर कहलाता है

खतरा होने पर आंख बंद कर लेता है कबूतर

शेर मुकाबला करता है , इसलिए शेर शेर कहलाता है..

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ना मुझे में कोई जूनून है

ना मुहे दो पल का सुकून है

ये कबूतर नहीं है मेरेई जान ,

ये तो मेरे दिल का खून है ..

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दर्द भी ना सहने देंगे

शांती से न रहने देंगे

हम कबुतर ही समाज के

हम तुझे अकेले नहीं रहने देंगे..

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हम दर दर भटकते रहे

खुद को जमी पर पटकते रहे

कबूतर भी कितनासहन करे

न जाने प्यार में कितने फासी पर लटकते रहे..

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