ट्रेन पर शयरी , train par shayari दोस्तों आजकल हर व्यक्ति की ज़िंदगी एक ट्रेन की तरह हो गई है , हर व्यक्ति का सफर लंबा है । सफर में न जाने कितने राहगीर मिलते है । कितनों से दिल लगता है। फिर कुछ ही घंटों में उन्हे छोडकर जाना पड़ता है। इसी प्रकार हम , जीवन में माँ बाप के संग होते है । फिर अकेले पड़ जाते है। बाद में जीवन साथी का साथ मिलता है । फिर अंत में अकेले पड़ जाते है। इसी के चलते हम आपके लिए ट्रेन पर कुछ शायरी लेकर आयें है । उम्मीद है की आपको ये शायरी बहुत पसंद आएगी। अगर आपको इनमे से कोई शायरी पसंद आए तो , इन शयरियों को अपनी डीपी पर जरूर लगाएँ । ताकी आप बिन बोले बिन नाराज किए हुए अपने दिल की बाद उस सामने वाले व्यक्ति को बोल सकते है।
हमारी ज़िंदगी का सफर ,
ट्रेन के सफर जैसा है
बीच बीच स्टेशन आते रहते है ॥
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वो ट्रेन की तरह चलती है बेहोश हो जाते है हम
जब मधुहोश होकर चलती है तो खामोश हो जाते है हम ॥
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ट्रेन की आवाज दिल में अजीब कशिश पैदा करती है
उस पगली की अंखे दिल में हमदर्दी पैदा करती है ॥
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ट्रेन का सफर भी एक आँखों का धोका है
कर लो अभी सारी दूरियाँ छोटी अभी मौका है ॥

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ट्रेन का सफर और
मेरा हम सफर ‘
दोनों एक जैसे है ,
चलते चलते आवाज करने लग जाते है ॥
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ट्रेन में सफर करने का मजा ही कुछ अलग है
बैठे बैठे सामने वाली कुरशी पर
उससे नैन मटक्का करने का मजा ही कुछ अलग है ॥
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ट्रेन के सफर की कुछ अनोखी कहानी है
जब में गाँव जाता हूँ मुझे मजा आता है
क्योकि गाँव में मेरी नानी है ॥
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छूक छूक कर चलती है रेलगाड़ी
हम है एक पनवाड़ी
ऊपर से मारवाड़ी
हमे तो मुबारक हो हमारी बेलगाड़ी
हमारी औकात नहीं है देखने की रेलगाड़ी ॥
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रेलगाड़ी सबको पसंद है
इसमे सफर आसान हो जाता है
कभी मूँगफली वाला तो
कभी दाल चने वाला आ जाता है ॥
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ट्रेन के सफर में हमारी मुलाक़ात हुई थी
मैं निहार रहा था जब वो मेरे सामने सोई हुई थी॥
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ट्रेन के डिब्बे में जब मेरे आँख लग गई
पता ही नहीं चला की मेरे मंजिल कब भाग गई ॥
ट्रेन पर शयरी , train par shayari

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लंबा सफर ट्रेन का अच्छा लगता है
जब सफर में हमसफर हो तो अच्छा लगता है
जब पकड़े सफर में हाथ मेरा ,गिरने से रोके
मुझे तो अच्छा लगता है
जब बोलूँ में गलत बात ,बात पर टोके अच्छा लगता है ॥
हे खुदा तुझे कहता हूँ सलाम,
इस सफर के लिए…
मेरा दोस्त सही सलामत पहुँच गया,
शुक्रिया भाई इस खबर के लिए॥
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जीवन की असली शुरुआत ट्रेन से होती है
पाने के लिए अगली मंजिल , धड़कन तेज सी होती है।।
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दूर का सफर ट्रेन से हो
हम खेलते कूदते मंजिल पर पहुँच जाते
हमारा सफर एक खेल सा हो ॥
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हम ट्रेन की पटरी पर चलते है ताकी सकून मिले
बढ़े ऐसे मंजिल की तरह की एक नया जुनून मिले ॥
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ट्रेन आने का इंतजार हम करते रहे
वो लेट होती गई
उनकी यादों में रात भर आहें भरते रहे ,
बैठे रहे पटरियों पर
ज्यों ज्यों दिन उगा उम्मीद हमारी खोती गई ॥
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अगर ये ट्रेन नहीं होती तो
तो सफर कठीण होता
जब तक पहुँचते मंजिल तक
ये मस्तक गमगीन होता ॥

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दो बोगी बस जनरल डिब्बे है
गरीबों के सफर के लिए
ना तो नेताओं को ना ही सरकार को चिंता है
उन मुसकिल डगर के लिए ॥
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हे खुदा तुझे कहता हूँ सलाम इस सफर के लिए
मेरा दोस्त सही सलामत पहुँच गया
शुक्रिया भाई इस खबर के लिए ॥
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आजकल तो ट्रेन भी आपस में टकरा जाती है
छोटी छोटी बात पर ये सरकारे घबरा जाती है
अगर बोले इनके खिलाफ कोई तो
ये बड़ो बड़ों को मरवा जाती है ॥
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ट्रेन के भिड़ने की खबर को सरकार दबा लेती है
अगर आए कोई गरीब सामने तो उसे मुद्दा बना लेती है ॥
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आजकल तो बस और ट्रेन में रेप होने लगे है
ना कोई जगह सुनने वाला तुम्हारी चीख
देखकर इन बेजान की हालत हर कोई रोने लगे है ॥
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जब ट्रेन रुकती है तब लोग उतरते है
ज़िंदगी इस तरह से चलती है
क्या टेंसल लेना ज़िंदगी की
ये बातें तो यूं ही बनते है यूं ही बनती बिगड़ती चलती है॥
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दुवे का ये लंबा सिलसिला और ये पतिर्यों का लंबा सफर
मजा आयेगा पढ़कर ये ट्रेन की ताजा खबर ॥
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हर किसी मौसम में रुकता नहीं ट्रेन का सफर
ट्रेन ही एक ऐसी साधन है जिससे मिलती सभी को अपनी डगर ॥
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हर सफर में कोई ना कोई कहानी छूपी है
अगर रुके जाये ये कुछ पल तो कईयों की ज़िंदगानी छूपी है ॥
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बैठने से पहले ट्रेन में ले लिया करो टीकीट
अगर फडके जाओगे बिना टीकीट
तो गिर जाएगा तुम्हारे सम्मान का विककिट ॥
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ज़िंदगी के सफर को ट्रेन के सफर की तरह जीया करो
अगर आ जाये कड़वा घूंट तो हसकर पी लिया करो ॥
ज़िंदगी के सफर को
ट्रेन के सफर की तरह जीया करो,
अगर आ जाये कड़वा घूंट
तो हसकर पी लिया करो॥
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ट्रेन के सफर को जीवन की तरह जीया करो
मिल जाये कोई लाचार तो उसकी मदद किया करो ॥
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ट्रेन एक सेवा है कोई मुनाफे का सौदा नहीं
ट्रेन ने सभी को पहुंचाया मंजिल तक
बिना मंजिल के किसी को छोड़ा नहीं
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वो टूटी हुई पटरियाँ अरु बिखरा हुआ सामान
कई जिंदगी को रोंद गया , उड़ गए अरमान ॥
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ट्रेन का हादसा देखकर मुझे मेरा माँ याद आई
कहती थी सफर में पराठे ले जा उसकी मुझे बहुत याद आई ॥
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आज रुक गई ट्रेन जो कभी ना रुकती थी
झुक गई मेरे गम देखकर जो कभी नहीं झुकती थी ॥

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पटरी पर लाशें बिछी थी आसमा रो रहा था
पता नहीं मेरा मंत्री कोनसी भांग खाकर सो रहा था ॥
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बिखरी हुई लाशें पटरी पर देखकर
ये खुला आसमान भी रोया होगा
लाखों कमाने वाला भी आज रोया होगा
भला कौन है जो इस घटना को देखकर सोया होगा ॥
बिखरी हुई लाशें पटरी पर देखकर,
ये खुला आसमान भी रोया होगा।
लाखों कमाने वाला भी आज रोया होगा,
भला कौन है जो इस घटना को देखकर सोया होगा॥
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जीवन की रेल रुकी मौत के स्टेशन पर आकार
अब तो सरकारी सिस्टम खुश है क्या
लाखों की ज़िंदगी तबाह करकर ॥
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ना ट्रेन रुकेगी ना हादसे कम होंगे
जिस ज़िंदगी में जितना ट्रेन से करोगे
उतने ही ज्यादा गम होंगे ॥
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जिस तरह बादलों की दोस्ती है रेन की
उसी प्रकार हमसफर में दोस्ती हैं ट्रेन की ॥
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ट्रेन में सफर करने का दर्द अनोखा है
एक ट्रेन में दो लोकल डिब्बे ये हमारे साथ धोका है ॥
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ऐसा कहा जाता है की इंडियन ट्रेन तो घाटे में चलती है
नेताओं को क्या पता की गरीबों की रोटी तो इनही से चलती है ॥
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सरकार का रोना है की ट्रेन घाटे में चल रही है
असली बात तो ये है की रेल के पैसे से सरकार पल रही है ॥
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जब देश की सरकार सो जाती है
तो देश में क्राइम बढ़ता है
तुम्हारी हरकत देखकर पाकिस्तान भी हम पर चढ़ता है ॥
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हर ट्रेन का एक टाइम होता है
हमारी सरकारी सोई रहती है
इनही कारण समाज में क्राइम होता है ॥
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ट्रेन के डिब्बों में बैठे लोग हँसते हैं,
कोई पढ़ता है, कोई सोता है
ट्रेन का सफर कुछ इसी
तरह से होता है।
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जब में खिड़की से बाहर देखता हूँ
कुछ नहीं दिखता उस सनम के बिना
भाता नहीं उसके बिना कुछ भी
दिख जाये वो मुझे तो में बिन मौसम बहकता हूँ॥

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ट्रेन की खिड़की से जब में बहार देखता हूँ
कहीं दूर उसका चेहरा ढूँढता हूँ
कुछ नहीं मिलता मुझे इन सफर से
हर बार घर खाली हाथ लौटता हूँ ॥
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जब ट्रेन चली गई तो फिर से प्लेटफार्म पर खामोसी छा गई
जब ट्रेन का फिर से हॉर्न बाजा तो झट से उसकी याद आ गई
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उसकी याद में ट्रेन में खामोसी छा गई
जब उसे पता चला तो बिन कारण ट्रेन में सफर करने आ गई ॥
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कास ये ट्रेन मेरे कहने पर चलती
तो मेरी प्रेमिया यूं ना बदलती ॥
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काश ये ट्रेन होती मेरे करीब
तो यूं धोका ना देता मेरा नसीब ॥
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रेल की पतिर्यों की किस्मत में लिखी होती है जुदाई
हमे कुछ हासिल नहीं हुआ तेरा पीछा करने से
हमने तो यूं ही अपनी ज़िंदगी गंवाई ॥
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धुवे का बादल और सीटी की आवाज
चलती है ट्रेन तो आती है तेरी याद ॥
ट्रेन तो सफर को आसान बनाती है,
लड़की जिंदगी को शमशान बनाती है!
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जब दिखती है चलती हुई ट्रेन
और दिल में उठती है एक अजीब सी अंधी
एक तेरी मुस्कान के आगे है फीका सोना चांदी ॥
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ट्रेन नहीं रुकती बिना स्टेसन
पर तेरा गम दर्द देता है हर सिचुवेसन पर ॥
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ट्रेन तो रुक जाती है हर किसी स्टेशन पर
मगर मेरा दर्द टीका है तेरी रिलेसन पर ॥
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ट्रेन तो सफर को आसान बनती है
लड़की जिदंगी को समसान बनाती है ॥
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ट्रेन सफर को आसान बनती है
मगर तेरी याद ज़िंदगी को समसान बनाती है ॥
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ट्रेन के सफर में आस लिए चल रही हूँ
मुझे वो पसंद नहीं फिर भी अंदर से जल रही हूँ ॥

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खिड़की से देखता हूँ तो सफर तन्हा नजर आता है
लड़ाई हो गई मेरे उससे
फिर भी पता नहीं वो मुझे क्यों भाता है ॥
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बिना उसके मेरा सफर बेईमानी लगता है
उसके बिना मेरा गुजरा कल एक कहानी लगता है॥
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ट्रेन तो मंजिल की तरफ चलती रहती है
कसकर रखा है मैंने मुट्ठी को
फिर भी न जाने ये ज़िंदगी फिसलती रहती है ॥
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खिड़की से देखता हूँ तो सफर तन्हा नजर आता है,
लड़ाई हो गई मेरी उससे,
फिर भी पता नहीं वो मुझे क्यों भाता है॥
ट्रेन में हमसफर चला जाता है
पर उसका दिल मेरे पार ही रह जाता है ,
आँखों में बहुत बातें है पर वो
कुछ कह नहीं पाता है॥
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हर स्टेशन पर हर कोई उतर गया
अभी तो इधर था
एक पर में न जाने मेरा वाला किधर गया ॥
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मेरा वाला स्टेशन पर उतर गया
बनाकर बहाना वो किसी और के घर गया ॥

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हम ट्रेन में चुपचाप और बेदम था
तुने ही तो तोड़ा था मेरा दिल
गम देने के लिए अपने क्या कम थे ॥
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ट्रेन का सफर आज तक रुका नहीं
ये बंदा तेरे अलावा किसी के सामने झुका नहीं
चलता रहा हूँ जीवन के लंबे सफरा में
छोटी छोटी मूषिबतों से रुका नहीं ॥
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ट्रेन का सफर हमेशा याद रहता है
भले भूल जाएँ हम उसे पर उसे सब कुछ याद रहता है
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जब ट्रेन चली गई तो प्लेटफार्म खाली हो गया
जो कल तक जान से ज्यादा चाहती थी
हालत क्या बिगड़े उसके लिए आज में गाली हो गया ॥
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ट्रेन में चढ़कर देखों यारो
एक सीट पे दस बैठकर देखों यारों
हर कोई सिस्टम को गली दे रहा है
सिस्टम की हकीकत तो जानों यारों
खुद जाकर देखों
मेरे तो ना मानो यारो॥
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लोकल ट्रेन में चढ़कर देखों यारो
एक सीट पर दश दश बैठे है
कुछ लेटे हुए है तो कुछ बैठे है ॥
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हम सरकार के चमचे नहीं जो ट्रेन की तारीफ करेंगे
बदले ट्रेन की हालत ये हम सरकरे से गुजारिस करेंगे ॥
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सरफ ट्रेन का बहुत निराला होता है
जो सामने की सीट पर बैठा
हर वो एक निराला होता है ॥
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ट्रेन में बैठने वाला हर बंदा होता है एसी चाहने वाला
आने वाले टूटी ट्रेन, टूटा पंखा , लगता बुरा हाल होने वाला ॥
जब ट्रेन स्टेशन पर रुकी तो मैं ज़ोर से भागा,
मेरे सारे सपने चकनाचूर हो गए,
जब मैं नींद से जागा॥
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ट्रेन में सफर करने वाला हर एक मुसाफिर होता है
बन जाता है हर कोई दोस्त सफर में ना किसी की खबर होती है ॥
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ट्रेन में एक आदमी चाय लेकर आया
एक पराठा मैंने भी चाय संग खाया ॥
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जब ट्रेन स्टेशन पर रुकी तो में ज़ोर से भागा
मेरे सारे सपने चकनाचूर हो गए जब में नींद से जागा॥
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झटके खाये, धक्के खाये
ये ट्रेन की यात्रा है प्यारे
ऐसी सफर की याद कभी न जाये ॥
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मौसम हसीन था
आसमा रंगीन था
दूर से दिखाई दिया धुवे का गुबार
पर ये मस्त ट्रेन का सीन था ॥
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ट्रेन की खिड़की से देखा तो मौसम हसीन था
एक दिन मिलेगा बीचड़ा हुआ मेरा साथी मुझे यकीन था ॥
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बिना टिकिट चढ़ गया ट्रेन
मैंने सोचा की बैठा हूँ वें में ॥
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कुछ हसीनाओं के चक्कर में ट्रेन का टीकीट लेना भूल गया
एक हसीन सा ऐसा दिल लगा की उसके लिए फंदे पर झूल गया ॥
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कुछ लोग टिकट बिना ट्रेन में सफर करते है
हर किसी के सामने अपने प्यार का जीकर करते है ॥
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जब चढ़ा ट्रेन में बिना टिकिट तो
किस्मत ने साथ नहीं दिया
जब पड़ा भारी फाइन तो
जेब पुलिश में हाथ दिया ॥

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बसों का किराया बढ़ गया
ट्रेन का किराया बढ़ गया
जब चोकीदार ने सैलरी बढ़ाने की बात की
तो मालिक सर पर चढ़ गया ॥
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टेक्स पे टेक्स लगाए खुशी के गीत गाये जा
ये धरती है तेरे बाप की तू जी जान से लूटाए जा॥
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बस और ट्रेन का किराया बढ़ गया
जब कुली ने दो रुपए ज्यादा मानते तो
मालिक जूती सहित सर पर चढ़ गया ॥
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तू टेक्स पर टेक्स लगाए जा
गरीबों को बिन कारण सताये जा
क्या करेगा इतने पैसे का
जरा हमको भी तो बताए जा॥
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गरीबों का जीना मुहाल हो गया
टेक्स देते देते में तो कंगाल हो गया
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फ्री होना चाहिए ट्रेन का सफर
यह सेवा सबके लिए हो
ये पहुंचनी चाहिए सबको खबर ॥
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जब तो ट्रेन आपस में टकरा रही है
गठबंधन की देखकर सरकार जनता घबरा रही है ॥
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सीता रमन खेत में बकरी चरा रही है
बिना कारण किसानों को सता रही है
जब कोई पूछता है इनके तो
ये जुल्मो की कहानी को तरकी बता रही है ॥

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गरीबों का जीना बेहाल है
हर तरफ किराया बढ़ा रहा
देश की जनता का बुरा हाल है
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पटरी पर तो ट्रेन आपस में टकरा रही है
मोटा टेक्स देखकर जनता घबरा रही है
फिर भी जी नहीं भर्ता सकराकर का
युद्ध के नाम पर लूट मचा रही है ॥
ट्रेन में सफर करने का मजा
और जीवन में प्यार करने का मजा
दोनों एक जैसे ही होते है
दोनों में खड़े ही रहना पड़ता है!
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खुद की झोली भर लो जनता जाये भाड़ में
खतरे से खाली नहीं है ट्रेन का सफर
आज कल इन्हे लूट लिया जाता है उजाड़ में ॥
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आजकल ट्रेन में हो रही है लूट
सरकार ने दे राखी है इन्हे खूली छूट ॥
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में तिवाना हूँ इस ट्रेन के सफर का
में तो असली हीरों हु इस नगर का ॥
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ट्रेन में सफर करने का मजा
और जीवन में प्यार करने का मजा
दोनों एक जैसे ही होते है
दोनों में खड़े ही रहना पड़ता है
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ये गंदगी और ये लापरवाही
ट्रेन के सफर को बेकार बना रही है ,
जनता बुरी नहीं है , गंदे नियम तो सरकार बना रही है ॥
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ये लोकतंत्र है साहब
इसमे ट्रेन का सफर और
मौत की खबर दोनों एक जैसी ही है

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रात में ट्रेन के सफर से डरती हूँ
आ गई तुझसे मिलने सेंकड़ों मिल
क्योकि में प्यार तुझी से करती हूँ ॥
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ट्रेन के सफर में अपराधियों
का आना जाना रहता है
हर जेल में इंका ठिकाना रहता है ॥
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नागिन पर शायरी(जब पत्नी या प्रेमिका धोकेबाज़ हो )
पड़ोसन पर शायरी 150 + जब पड़ोसन पर दिल आ जाये
अंधभक्त के लिए फनी 150 मस्त शायरी चिढ़ाने के लिए
सरकारी नौकरी पर शायरी , तंज़ कसने और सिस्टम को हिलाने वाली 200 +
रेड लिपस्टिक पर शायरी 110+ जो प्रेमिका को खुश कर देगी
ग्रीन शूट पर शायरी (प्रेमिका की तारीफ में दो अल्फाज )
काली साड़ी पर 150 शायरी (पत्नी की तारीफ़ में )
ट्रेन का सफर दिन में करें
ताकी आप किसी और की
करना का फल ना भरें ॥
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ट्रेन का हॉर्न सुनकर में रात को जागा
तेरा नाम देखकर अखबार में
में बिन चपलों के भागा ॥
ट्रेन का हॉर्न सुनकर मैं रात को जागा,
तेरा नाम देखकर अखबार में…
मैं बिन चपलों के भागा।

