सरकारी नौकरी पर शायरी , तंज़ कसने और सिस्टम को हिलाने वाली 200 +

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sarkari naukri shayari, सरकारी नौकरी पर शायरी, दोस्तों हमे समाज में देखने को मिलता है , जब तक कोई व्यक्ति सरकारी नौकरी नहीं लगता तब तक वह सरकार और सरकार के सिस्टम को कोसता है । सरकारी नौकरी लागने के बाद है व्यक्ति उस भ्रस्ट सिस्टम का हिस्सा हो जाता है। फिर वो जनता के बारे में बिलकुल नहीं सोचता है। सिर्फ अपनी तंख्वाह के बारे में सोचता है। हम सोचते है सरकार और सरकारी नोकरी करने वाले जनकल्याण काम करेंगे। ये हमारी भूल है। क्योकि ये सबसे ज्यादा स्वार्थी लोग होते है। समाज में इन लोगों का कोई योगदान नहीं होता है।

ये सिर्फ अपने स्वार्थ के लिए जीते है। आज तक आपने कोई ऐसा विभाग देखा है क्या जिसने प्राइवेट नौकरी करने वाले लोगों के बारे में सोचा होगा। समय समय पर सरकारी नौकर के लिए वेतन बढ़ोतरी नियम आते रहते है। जबकि आज तक प्राइवेट नौकरी करने वाले के लिए कोई वेतन आयोग नहीं आता । समाज में जो भी बदलाव आता है क्रांति घटित होती है । या कोई नई चीज बनती है या नया इतिहास बनता है वो गैर सरकारी विभाग वाले करते है। सरकारी सिस्टम में काम करने वालों का समाज में कोई योगदान नही होता है। सरकार सिर्फ दिखावा करती है। धोनी की अच्छी परफॉर्मेंस देखकर उसे आर्मी में नामी पद दे दिया जाता है। ताकी आर्मी की शान बढ़े ।

आज हम आपके लिए ऐसी ही शयरियों का संग्रह लेकर आए है । जो सरकारी नौकर की रूह को झकजोर देगा । आप इन शयरियों को इतना शेर करो ताकी उनके सामने ये शायरी जाये । अगर हजार लोग इन शायरी को पढ़ेंगे तो निश्चित ही एक या दो लोगों में ये बदलाव होगा। उनके अंदर की सोई हुई आत्मा जागेगी । यही से एक अच्छी शुरुआत होगी । जो गैर सरकारी नौकरी करने वालों के लिए एक बहुत बड़ी जीत की शुरुआत होगी।

हम तो सरकार के नौकर है

हम कुछ नहीं कर सकते समाज के लिए

हम तो सरकार के कहने पर चलते है

हम तो सर्कस के जोकर है ॥

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हम तो सरकार के दामाद है

हम सरकार के खेत में खाद है

हम उसके सहारे चलते है

जिसमे ढेर सारे अपवाद है ॥

sarkari naukari par shayari

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अगर सरकारी नौकर में दम है तो

वो सीएम को भी झुका सकता

करके अपने फर्ज का हक अदा

वो अपने पद की ताकत दिखा सकता है ॥

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एक दिन तुझे सफल होकर दिखलाएंगे

भले कदम हमारे धीरे चलते हो

पर एक दिन सरकार के दामाद कहलएंगे ॥

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दिल में उम्मीद सरकारी नौकरी लागने की

इसलिए घर वालों से दूर बैठा हूँ ॥

याद आती है घर वालों की पर क्या करूँ

उनको खुश करने के लिए मजबूर बैठा हूँ॥

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काश नोकरी हमारी सरकरी हो

बस एक छोटी सी आस हमारी हो ,

एक हमसफर हो और एक सवारी हो ॥

sarkari naukari shayari

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जो नौकरी करने में मजा है वो बिज़नस में नहीं

पैसे में वो मजा है वो सजने में नहीं ॥

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नौकरी में जो मजा है वो और काम में नहीं

जो मजा राज सही में है वो मजा सरकार में नहीं ॥

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इंतिहान की रातों में खोया हूँ

महीनो हो गए जागे हुए

अभी तक चेन की नींद नहीं सोया हूँ ॥

sarkari nokri shyari in hindi

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हर साल सरकारी नौकर की सलरी बढ़ जाती है

ये घटिया सरकार जनता से वोट लेकर उनही को मरवाती है ॥

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सरकारी हमारे पैसे  लूटकर सरकारी नौकर को बांटती है

जब कोई इसका विरोध करे तो उसे खूब डांटती है ।

फिर भी करें इन्हे रोकने की कौशिश तो

फिर वो इसे कई हिस्सो में काटती है ॥

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ये गंदी सरकार वोटों के लिए हमारे आगे मंड जाती है

जीतने के बाद यही सरकार जनता पर चढ़ जाती है ॥

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सरकारी नौकरी का सपना सँजो रखा है

इसलिए खुद को दुनियाँ की नजर से खो रखा है ॥

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सरकारी नौकर लाखों की सैलरी लेकर भी रिस्वत खाता है

करके लाखों घोटाले फिर अपने को देखभक्त बताता है ॥

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इज्जत बहुत है समाज में सरकारी नौकरी की

एक बार अगर मिल गई सरकारी नौकरी

फिर शादी के लिए चिंता नहीं होती छोकरी की ॥

naukari par shayari

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मेहनत और इंतजार का सफर है ये

सरकारी नोकरी लगना मेरी डगर है ये॥

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हम सरकारी नौकर है साहब

सिस्टाम को दिमाग की तरह चाटते है

जब भी हमे कोई रिस्वत मिले

हमे उसे नीचे तक बांटते है। 

करके ईमानदारी का झूठा दिखावा

हम अपने जूनियर को डाटते है ॥

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पैसे दो और सरकारी नौकरी लो

यही ही इस देश का खेल है

अगर लग जाये एक बार सरकारी नौकरी

फिर ज़िंदगी भर तेल ही तेल है ॥

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जब मंजिल मिलेगी तो गूंज उठेगा गाँव का कोना कोना

मेरे घर वालों का मिट जाएगा रोना धोना

चारों और खुशियाँ होगी , घर में होगा चाँदी सोना ॥

सरकारी नौकरी शायरी

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इधर से भी लूटो

उधर से भी लूटो

तुम पूरे देश को खा जाओ

अब हम अकेले बचे है

सरकारी नौकरी के नाम पर

हमे भी बेच खाओ ॥

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आज काम करने का मन नहीं है तो नहीं करेंगे

हम तो सरकारी नौकर है साब हम किसी से नहीं डरेंगे ॥

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अभी में इंतियाँन की रातों में खोया हूँ

सरकार की बातों में खोया हूँ

ए नींद दूर होजा मेरे नजरों से

में अभी सरकारी नोकरी के ख़ाब सजोया हूँ ॥

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हमारा कोई क्या उखाड़ लेगा , हम तो सरकारी नौकर है

करते है अपने मन की , हम तो मन के राजा , हमारे आगे सारे जोकर है ॥

सरकारी सिस्टम पर शायरी

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सरकार को हम चलते है

समाज को हम चलते है

हम काम करते ही नेताओ के

जानते के पैसे खाते है

हमारे आगे झुकता है देख

हम सरकारी बाबू कहलाते है ॥

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तकदीर पलटेगी एक दिन जरूर

मेरे दुश्मनों का टूटेगा गुरूर

नजदीक ले आऊँगा उन सभी को

जो पैसों के कारण है मुझ से दूर॥

सरकारी नौकरी वाली शायरी

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सरकारी नौकरी करने वाला हर व्यक्ति करोड़पति होता है

एक प्राइवेट नौकर कितना भी कमा ले वो रोडपती होता है ॥

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सरकारी नौकर के पास भी सरकारी कार है

इनके आगे तो एक प्राइवेट आदमी का जीना बेकार है॥

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लड़की के लिए सरकारी दामाद होना चाहिए

सर पर नौकरी का ताज होना चाहिए

बेटी उसी को देंगे

जिका सिस्टम पर राज होना चाहिए ॥

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बस ईसी आस में हर पल जागा और सोया हूँ

सरकारी नकरी के ख़यालों में खोया हूँ

सफल होने के लिए न जाने कितनों के आगे रोया हूँ ॥

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पूल बनाने में भी खाते है

पूल पर चलने पर भी खाते है

हम सरकारी नौकर है साहब

हम जहां भी जाते है मलाई ही पाते है ॥

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ना मेहनत की जरूरत

ना रोने ककई जरूरत

हमारे लिए कोई भी समय बुरा नहीं होता

हर मौसम होता है हमारे लिए शुभ मुहूरत ॥

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वैसे तो इस जगत में जॉब अनेक है

इन सभी में सरकारी नौकरी एक है ॥

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काम कम अधिकार ज्यादा

ऑफिस में बैठो बनो मस्त मियां

चाय पानी अखबार की रूटीन

यही है सरकारी नौकर की परिभाषा ॥

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लांच हो गया है कल आना

यह कहकर भागा देते है

नियत खुद की खराब होती है तब

वो सर्वर खराब बता देते है ।

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मुझे परिवार का नाम रोशन करना है

लगकर सरकारी नौकरी देश को ऊंचा करना है

लहराकर देश का तिरंगा

भारत माता का सर फकर से ऊंचा करना है ॥

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प्राइवेट नौकर का कभी सर्वर डाउन नहीं होता

वो वर्क लोड के लिए कभी नही रोता

खाकर मेहनत की रोटी वो चेन से सोता है ॥

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सरकार हमारी जेब में है

हम जिसे चाहे चढ़ा दें या गिरा दें

हमारी एक छोटी सी चूक

जनता को वर्षों तक घूमा दे ॥

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क्या रखा है इन प्राइवेट नौकरीयों के धक्को में

असली मजा तो छूपा है इन सरकारी दफ्तरों में

आजा जाओ बैठो इन कुरशियों पर

समय बीत जाता है , चाय गुथखा और अखबारो में ॥

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चाहे कितना भी कपिटिसन आ जाये

हमे कोई हटा नहीं सकता

हम सरकारी नौकर ही साहब

हमे  कोई सटा नहीं सकता

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हमे ना नौकरी खोने क डर

आसमान में उड़ता हमारा सर

कोई हमे कितना भी नीच क्यों ना कह दे

अक्सर सोने से बने होते है हमारे घर ॥

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फेशन की आश काम से आजादी

सरकारी नौकरी समय की बरबादी

समय गुजर जाता है काम होता नहीं

कुरशियों पर बैठे बैठे ज़िंदगी गुजर जाती है आधी आधी ॥

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सैलरी हमारी हर साल बढ़ जाया करती है

करते नहीं कम जब

सरकार हमारे आगे झुख जाया करती है ॥

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हर साल हमारी तंख्वाह बढ़ जाती है

हमे गरीबी की याद क्यों आती है ॥

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अगर नौकरी सरकारी हो तो लड़की सुंदर मिलेगी

अगर पैसा है सरकारी तो

जिदंगी खिल उठेगी ॥

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सरकारी नौकर के चेहरे की रोनाक फीकी नहीं पड़ती

उसे कभी रुपयों पैसो की कभी नहीं अड़ती ॥

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हमारे यहाँ हर कोई सरकारी नौकरी के लिए तड़फता है

अगर लग कई एक बार सरकारी नौकरी

तो फिर वही सिस्टम को हड़पता है ॥

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पहले जो सिस्टम को गाली देते है

लाग्ने के बाद सरकारी नौकरी वही सिस्टम को ताली देते है॥

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फाइलों पर धूल चढ़ी है हर दफ्तर की यही कहानी है

हर सरकारी नौकर की यही कहानी है ॥

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दो दिन की प्राइवेट नौकरी दो दिन के अरमान

लग गई एक बार सरकारी नौकरी

तो जिंदगी बन जाएगी मेरे तीर कमान ॥

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देश में अच्छा काम अब कोई बचा नहीं

कोई नहीं करना चाहता प्राइवेट नौकरी

सरकारी आदमी कोई यहाँ सछा नही ॥

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काम शुरू होता नहीं दफ्तर का और

छूट्टी की घंटी बज जाती है

यही करते करते इनकी तो उम्र बीत जाती है ॥

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हर आदमी सरकारी नौकरी के लिए क्यों रोता है

सरकारी नौकरी में तंख्वाह लाखों में प्राइवेट में हजारों में

कोई तो पूछे इन सरकारों से की इनमे इतना अंतर क्यों होता है ॥

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प्यार मे दिलदारी हो ,

नौकरी हो तो सरकारी हो ,

ना करनी पड़े मेहनत

ऐसी जिम्मेदारी हो ॥

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इतनी आलस सरकारी दफ्तर में देखने को मिलता है

कोन करने देता है इतना आराम ज़िंदगी में

हमारे यहाँ तो घंटो घंटो दफ्तरों में बैठने को मिलता है॥

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हम तो नौकरी करते है सरकारी

अपनी बेटी देनी हो तो जल्दी करो

नहीं आ जाएगी की किसी और की बारी॥

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कुछ भी हो पर दामाद सरकारी होना चाहिए

जिदंगी भर तकलीफ ना हो मेरी बेटी को

कोई चीज की कमी न हो उसको

ऑफिस की सवारी होनी चाहिए ॥

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सरकारी कुर्शी पर बैठे बैठे कब समय का पता चलता है

लगा रहता ही कुर्शी पर फाइलों का ढेर , मन तो मोबाइल में लगता है ॥

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मेरे दिल की धड़कन है नौकरी सरकारी

एक बार मिल जाये

तो दुश्मनों में पैदा हो जाएगी बेकारी ॥ ]

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अगर लग गई सरकारी नौकरी तो गरूर आ जाता है

फिर वो छोटे बड़ों का फर्क नहीं समझता

उनकी आवाज में घमंड का सुरूर आ जाता है॥

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सरकारी अफसर काम कुछ करते नहीं दिन भर मोबाइल चलते है

करते गरीब के साथ नाइसफ़ी ये लाखो के दिल जलाते है ॥

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जो लोग मेहनत करके सरकारी नौकरी पाते है

वो हमेशन गरीबों को अपनी चोखट पर पाते है

करते नहीं घमंड वो अपनी नौकरी का

सुनते है सभी की परेशनी वो कभी किसी का दिल नहीं दुखते है ॥

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सरकारी नौकरी में मेहनत लगती है

दिखने में मोमबती जलती हो पर खुद की अंखे जलती है ,

करते है वो रातें एक तभी मेहनत फलती फूलती है॥

इन शयरियों को भी जानें …….

पतली कमर पर शायरी

राजपूत पर शायरी

कबूतर पर शायरी

गुलाबी सूट पर शायरी

हरे रंग की साड़ी पर शायरी

भिखारी पर शायरी

मेहनत करके जो नोकरी पाते है

वो हर जगह सम्मान पाते है॥

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मेहनत करूँ दिन रात मुझे पाने है सरकारी ठाठ

माँ बाप की ख्वाहिव पूरी करूँ बनना है मुझे साब ॥

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हम तो रिज़ल्ट के इंतजार में बैठे है

सरकारी नौकरी की आस में बैठे है

मुझे तो शर्म आने लगी इस बेरोजगारी से

लोग ना जाने में मुझे क्या क्या कहते है ॥

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सबसे ज्यादा सरकारी नौकर करते है शोर

इनके अंदर बैठा है मक्कारी का चोर

सरमाते नहीं रिस्वत मांगते हुए

हर सरकारी आदमी है अंदर से हरामखोर ॥

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सरकारी नौकरी जान से ज्यादा प्यारी है

क्योकि एक बार लग जाये तो इसके मधुहोशी न्यारी है ॥

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मेहनत कोई करे और मजे कोई लूटे

ऐसे ही होते है सरकारी नौकर

घोर मतलबी मक्कार और झूठे ॥

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दफ्तर के अंदर घटती नई कहानी है

भले दुनिया कितनी भी बदले पर

अपनी आदत तो वही पुरानी है ॥

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जिस दिन आया सरकारी नौकरी में अपना नंबर

तो दिल बाग बाग हो गया

लोग दिने लगे इज्जत और गली में शाब शाब हो गया ॥

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चिमनी की रोशनी में पढ़ाई करता था

करता था ईंट भटों पर कम शाम को खाई करता था ॥

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पैदा हुआ था सरकारी नौकरी का ख्वाब लेकर

लाख कौशिश की नौकरी पाने की

आखिर हर गया में फोरम के पैसे दे देकर ॥

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एक दिन हम ताकत अपनी दिखाएंगे

लग जाएगी सरकारी नौकरी , तभी हम गाँव जाएँगे ॥

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जिस दिन हम खुद को साबित कर देंगे

लगकर सरकारी नौकरी हम तेरी चाहत पूरी कर देंगे

पहनकर गले में माला तेरे मांग में सिंदूर भर देंगे ॥

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आठ घंटे की ड्यूटी में काफी फटकार तो कभी काम का तूफान है

चाय की चुसकियों के संग कभी कभी तो पूरा दिन ही आराम है ॥

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सरकारी नौकरी लगना इस दिल का अरमान था

तब जाकर मेरा सपना पूरा हुआ जब सामने मेरे समसान था

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अगर लग गए एक बार सरकारी नौकरी

तो फिर ज़िंदगी भर मजे करेंगे

ना कोई शिकायत ना कोई मेहनत

फिर तो राजा की तरह ज़िंदगी गुजर करेंगे ॥

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देश की सेवा के नाम पर हर दिन कौशिश जाती है

बोली जनता को विकाश के नाम पर ये रोज सताती है ॥

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हम तो बुड्ढे हो गए सरकारी नौकरी करते करते

कुछ हासिल ना कर सके इस ज़िंदगी में

शमशान तक पहुँच गए हम डरते डरते॥

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पद कोई निकलता नहीं ऐसा कैसे होता है

रोजगार के नाम पर लाखों ठगते है

भला कोई हमारा करे ऐसा कैसे हो सकता है ॥

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सरकारी नौकरी के बाद

सब कुछ मिल जाता है छोरी के बाद॥

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यहाँ पर नियम कानून का जाल है

इनको सब पता है क्या है जनता का सवाल

लोगों को उलझाए रखते है कानून के दलाल

ये और कुछ नहीं , इनही का रहा हुआ है मायाजाल ॥

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ना मिलेगी भारी सैलरी ना होगा तेरा किसी को खोब

तू भूल जा भाई इसे तू अब दूसरी खोज ॥

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काश बेमौसम बारिश हो जाये

सरकारी नौकरी की चाहत दिल में हो जाये

तो ज़िंदगी आसान मेरे हो जाये

काश मेरे सोई हुई किस्मत फिर से जाग जाए ॥

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सरकारी योजनाए आती है

कागज में भरी जाती है

जमीनी स्तर पर कंकड़ भी ना हो

पर चुनावी रेली में खूब गिनी जाती है ॥

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आम भी खाएँगे और सेब भी

अगर लग गई एक बार सरकारी नौकरी तो

तो कोई कमी नहीं होगी धन की हमेशा भारी रहेगी जेब ॥

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घर बनाएगे सोने का

और बनाएँगे सोने का बेड

लाखों में तो अभी भी हमारा

आज का रेट ॥

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कभी हाँ, कभी ना कभी कल फिर आना

ये सरकारी आदत है साहब सभी की पड़ता है इसे अपनाना ॥

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पैसा फेंको और तमासा देखो

नौकरी कैसी चाहिए आपको

करो बड़े नेता को काबू और बन जाओ बाबू॥

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नौकरी हो तो सरकारी हो

ना सर पर कोई ज़िम्मेदारी हो

मस्ती से कटे ये ये जिंदगी

ना सर पर किसी की पहरेदारी हो ॥

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हमारे यहाँ मोहर की कीमत होती है

इंसान के साथ क्या इंसाफ होगा

ये सब मूँड की कीमत होती है॥

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तब हम खूब पार्टी करेंगे

जब हमे सरकारी नौकरी मिलेगी

क्यों निराश होते हो मेरे यारों

तेरे भाई की ज़िंदगी भी एक दिन खिलेगी ॥

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पुलिश वाले दारू मांगते है

अफसर सारे रिस्वत मांगते है

साले पलते है हमारे फेंके टुकड़ों पर फिर भी

सारे सरकारी नौकर हमारे को बिखरी मानते है ॥

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सरकारी नौकरी के दिल में अरमान बहुत सारे है

मगर मिलती नहीं आसानी से नौकरी

मेहनत इतनी की समुद्र के बीच ना दिखते किनारे है ॥

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योजनाए आती है जाती है

कागज पर भरी जाती है

खा जाते है योजना की राशि

यही नीति इंसाफ कहलाती है ॥

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अगर किस्मत अपना साथ देगी तो हम सरकार को गुलाम बनाएँगे

एक दिन बनकर सरकारी नौकर , घर के आगे नाम लगाएंगे ॥

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सरकारी नौकरी का सूरज कभी अस्त नहीं होता

बिजनेस और कंपनियाँ डूब जाती है मगर

सरकारी नौकरी करने वाले कभी पस्त नहीं होता ॥

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सरकारी नौकरी वाले पर महंगाई का फर्क नहीं पड़ता

उड़ जाते है अंधियों में पेड़ के पेड़ मंगर इनका एक पता तक नहीं झड़ता ॥

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जमीन खोए का डर है

किस्मत पर रोने का डर

अब मिली है सरकारी नकारी

आज सर उठाकर जी सकेंगे सर ॥

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सरकारी सिस्टम की महिमा हर किसी को समझ में नहीं आती

जो इसे समझ लेता है इसे उसकी झट से जेब भारी जाती ॥

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हम मस्ती पर मस्ती करेंगे

जिस दिन लग गए सरकारी नौकर

उस दिन जी भरके इञ्जोय करेंगे॥

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सरकारी नौकरी वाले की समाज में इज्जत और नाम होता है

उसके पास सोना चांदी बंगला गाड़ी और करोड़ों का समान होता है ॥

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दुनियाँ उम्मीद पर कायम है

बस यही सोच के दिल को रोक लेते है

सरकारी सिस्टम ही कुछ ऐसा है

उसपर कोई फर्क नहीं पड़ता

इसलिए गुस्सा शांत करने के लिए

इन पर हम कुत्ते की तरह भोंक लेते है ॥

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एक तो हर महीने सैलरी आती है

ऊसर से कमाई का मौका

कौन है ऐसा जो मौके पे न

मारना चाहेगा चोका ॥

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नौकरी करेंगे तो सरकारी ही करेंगे

वरना किसी के बाप के गुलाम नहीं बनेंगे

सफलता के लिए हम एक बार नहीं लाखों बार गिरेंगे ॥

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दिल में सरकारी नौकरी पाने का अरमान है

कभी हर नहीं मानेंगे

चाहे शरीर शंसान ही क्यों न बन जाये ।।

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फाइलें पड़ी है मेज पर बाबू दफ्तर में सोये है

देश की टरकी के सपने तो दफ्तरों में खोये है ॥

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सरकारी नोकरी करने वाले हवा में उड़ते है

गरीब लोग उनके फेंके जूते चुगते है ॥

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सरकारी नौकरी राजा जैसी होती है

में उसकी रानी बनूँगी जिसकी सरकारी नौकरी हो

ये हम नहीं सारी लड़कियां कहती है ॥

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सरकारी नौकरे के लिए सब मरे जा रहे है

उसके पाने के लिए उल्टा सीधा सब कुछ करे जा रहे है ॥

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सरकरी नौकरी के लिए सब मरे जा रहे है

पाने के लिए इसे दिन रात मेहनत करे जा रहे है॥

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जब कोई पूछता नहीं तो देश की तरक्की खो जाएगी

तुम ये ना समझना मेरा गुजारा चलता रहेगा

इसकी तरह चलता रहा तो तेरी किस्मत भी सो जाएगी

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अगर मिल गई सरकारी सीट तो हो जाएगी बल्ले बल्ले

नहीं तो सारी मेहनत बेकार हो जाएगी ज़िंदगी धुए के छले छल्ले ॥

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देस में बेरोजगारी का आलम इस कदर है की सांस लेना भी मुसकिल हो रहा है

आम इनशान 10000 की नौकरी के लिए भी रो रहा है॥

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दिल में आज भी दर्द् की सरकारी नौकरी मिली नहीं

बहुत पानी दिया बगीचे में पर एक भी कली खिली नहीं॥

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नोकरी तो सिर्फ सरकारी ही करेंगे ये दिल में आरमान था

करेंगे देश की सेवा खुद की खुद्दारी पर अबिमान था

हम ईमानदारी का ढिढोरा पीटते रह गई

आज हमे पता चला की ये देश तो पूरा बेईमान था॥

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बनकर अफसर जब हम गाँव में आए

तब जाकर मेरे दुश्मन भी मेरे छाँव में आए॥

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वो बोली अगर तुम नौकर बन जाओगे सरकारी तो

में जिदंगी में आ जाऊँगी तुम्हारी ॥

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हर मौसम में पैदा बढ़ता है

अगर तुम सरकारी नौकर हो तो

हर ऊंचाई पर पानी चढ़ता है॥

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आजकल इनशनों नहीं

पद की कदर होती है

पैसे वाले महलों में राजा करते है

जबकि अच्छे लोग सड़क पर सोते है॥

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मस्त ज़िंदगी है हमारी

में नौकर हूँ सरकारी

कोई नहीं दबा सकता मुझे

में हजारों पर अकेला हूँ भारी

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करना है तो नौकरी सरकारी करो

वरना सब चुलु भर पानी में डूब मरो ॥

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सरकारी नॉकर बड़ा ही निकम्मा होता है

बस ज़िम्मेदारी को टालते रहते है

इंनका कोई भी ना जिम्मा होता है ॥

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जोस के चक्कर में इस सिस्टम ने बर्बाद किया

भला हो इस प्राइवेट सेकटर का

इसने लाखो लोगों को जिंदा रखकर आबाद किया ॥

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दोस्तों सिस्टम और नोकरशाही पर हमारी शयरियों का संग्रह आपको कैसा लगा, हमे कमेंट करके बताएं, अगर आपको ये पोस्ट अछी लगी तो आप इन शयरियों को अपने स्टेटस पर लगाकर लोगों को जागृत करने का काम करें। हो सकता है की आपके एक प्रयश से कोई एक व्यक्ति भी सुधरता है तो , हम समझेंगे की हमारे द्वारा की गई मेहनत सफल हो गई है।

तो दोस्तों मिलते है अगली पोस्ट में नई शयरियों के साथ , आप किस विषय पर शायरी चाहते है। आप हमे कमेंट करके बताएं। हम उस विषय में शायरी लिखेंगे ॥

कमेंट बॉक्स में आप भी अपने दिल के अलफाज शायरी के रूप में लिखकर भेजे, हम आपकी शायरी को आपके नाम के साथ लोगों तक पहुँचने का काम करेंगे ॥

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