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मेरा गजानन्द है । और मैं इस ब्लॉग का निर्माता हूं,मेरे को शायरी लिखने का बचपन से ही शोक था और में लिखने के पिछे बिलकुल पागल हूँ में जब 9 साल का था । उस समय भी मैंने कई पत्रिकाओं में मेरी शायरी पब्लिश हुई। मेरे को स्कूल और कॉलेज में कई बार सम्मानित भी किया गया ।

मैंने कई शायरी अपनी डायरी में लिखी थी । अब ब्लॉग के माध्यम से अपनी शयरियों को लोगों के साथ साझा कर रहा हूँ।

साइट बनाने का उदेशय 

दोस्तों हमारा उद्देशय आपको हवा हवाई दुनिया से बाहर निकालना है। आपको कई ऐसी शायरी मिलेगी जो आपके घावों पर नमक छिड़कने का काम करेगी। आप मेरे से नाराज भी होंगे। लेकिन में आपके जख्मों को कुरेदूंगा तभी तो ठीक होंगे।

मैंने चाहता हूँ की मेरे दिल के अलफाज आपके दिलों तक पहुंचे । आप जिसे चीज को गलत मान रहे थे वो गलत नहीं है। और जिस चीज को सही मान रहे थे वो सही नहीं है।

हर शायर की अपनी कहानी होती है।

दोस्तों एक शायर बचपन से शायर नहीं होता है। उसके साथ भी कुछ ऐसा होता है जीकसे कारण वो शायर बन जाये। मेरे को भी प्यार हुआ था। फिर मेरा रब रूठा उर वो मुझे छोडकर चली गई। इसलिए मैंने उसकी याद में शायरी लिखनी शुरू की । अरु मेरे को पता तक नहीं चला की कब में एक शायर बना गया ।

हमने AI से लड़ाई कैसे की .

इससे पहले हमारी एक साईट sapnemein.com थी जिसको हमने कारणवंश बेच दी , उस पर भी हमने जमकर काम किया था इससे, इसके बाद हमने rekhta नामक साईट को कुछ महीनों तक सायरी प्रदान की , किसी कारणवंश उनके साथ हमारी अनबन हो गई और फिर हमने निर्णय लिया की अब हम खुद की पर्सनल साईट बनायेंगे . जिसे पर हमरा यूनिक कंटेंट होगा .

एक बार तो हमने ai के चक्कर में बर्बाद हो चुके थे , इसलिए हिम्मत नहीं हो रही थी, फिर हमने एक बार फिर से विचार किया की दुनिया का कितना भी बड़ा AI क्यों न आ जाए . लेकिन एक व्यक्ति अपने हाव भाव व्यक्त करने के लिए एक ह्यूमन का सहारा लेना ही पडेगा . आप एक मशीन के सामने रो नहीं सकते , इसके सामने प्यार का इजहार नहीं कर सकते है, एक मशीन को अपने मन की भावना नहीं बता सकते , ना ही उसके साथ इन्जोई कर सकते है. तो

हमने फिर से अपने आपको खडा किया , और AI को कड़ी चुनोती देते हुए , हमने पूरा contant अपने हाथों से और अपने दिल से लिखा है.

हमने ये जान लिया की एक इन्शान ही दुसरे इन्शान की मजबूरी समझ सकता है .. या एक इन्शान ही दुसरे इन्शान के आंशु पूंछ सकता है. मशीन तो सिर्फ नियमों पर चलती है.. लेकिन इन्शान कभी कभी अपनों के लिए या अपनों को भलाई के लिए नियमों को भी तोड़ सकता है.

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